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पितृपक्ष पर घर बैठे कर सकेंगे पिंडदान, QR कोड से मिलेंगे बिछड़े साथी... गयाजी में परंपरा और टेक्नॉलॉजी का संगम

Published: Sun, 27 Sep 2026 12:24 PM (IST)

गयाजी में पितृपक्ष मेला परंपरा और प्रौद्योगिकी का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रहा है, जहां श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए कई तकनीकी पहल की गई हैं।

गया में तकनीक से मिलेगी श्रद्धालुओं को सुविधा (Image Source: AI Generated)

गया में तकनीक से मिलेगी श्रद्धालुओं को सुविधा (Image Source: AI Generated)

HighLights

  1. QR कोड कलाई बैंड बिछड़े श्रद्धालुओं को परिजनों से मिलाएगा।

  2. गूगल ट्रांसलेटर व भाषिणी ऐप भाषा संबंधी बाधाएं दूर करेंगे।

  3. AI और CCTV से मेले की रियल-टाइम निगरानी, सुरक्षा सुनिश्चित।

डिजिटल डेस्क, गयाजी। पितृपक्ष मेला में परंपरा और प्रौद्योगिकी का संगम देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां श्रद्धालुओं को अपने पितरों का तर्पण करने के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, वहीं व्यवस्था बनाए रखने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी किया जा रहा है।

इस साल देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में हिंदू परंपरा निभाने में श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन ने तकनीक के सहारा लेकर कई व्यवस्थाएं की गई हैं।

भीड़ में बिछड़ने पर QR कोड करेगा मदद

मेला क्षेत्र में बच्चों एवं वृद्धजनों को अपने परिजनों से बिछड़ने से बचाने के उद्देश्य से QR कोड युक्त कलाई बैंड पहनाया जा रहा है। इस क्यू आर कोड में उनके परिजनों का मोबाइल नंबर एवं आवश्यक विवरण उपलब्ध रहेगा।

यदि कोई बच्चा अथवा वृद्धजन अपने परिजनों से बिछड़ जाता है, तो उनके माता-पिता अथवा परिजनों के मोबाइल पर अलर्ट मैसेज भेजा जाएगा।

भाषा की बाधाएं होंगी दूर

विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला में देश के सभी राज्यों के साथ-साथ अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को भाषा की वजह से बातचीत करने में कठिनाई न हो, इसके लिए मेला क्षेत्र में सभी हेल्प डेस्क पर गुगल ट्रांसलेटर युक्त सिस्टम लगाया गया है।

इस भाषिणी एप की सहायता से श्रद्धालु अपनी भाषा में सभी सवालों के जवाब पा सकते हैं और अपनी शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।

इसके माध्यम से विभिन्न भाषाओं में आने वाले श्रद्धालुओं की बात को कर्मी हिंदी में समझ सकेंगे तथा कर्मियों द्वारा हिंदी में दिए गए जवाब को श्रद्धालु अपनी भाषा में सुन सकेंगे।

रीयल टाइम मॉनिटिरिंग

AI तकनीक और 543 से अधिक CCTV कैमरों के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। किसी भी स्थान पर भीड़ बढ़ने या कानून-व्यवस्था की स्थिति पर अधिकारियों को लोकेशन के साथ तुरंत अलर्ट मिलता है।

ऐसे में भगदड़ की संभावना को कम किया जा सकता है। साथ ही किसी प्रकार की समस्या आने पर तुरंत एक्शन लिया जा सकता है।

घर बैठे पिंडदान

'पिंडदान गया जी' ऐप और वेबसाइट के जरिए श्रद्धालु घर बैठे ऑनलाइन पंजीकरण, वेदियों की जानकारी और टेंट सिटी, होटल-धर्मशालाओं, पार्किंग, स्वास्थ्य सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी एक क्लिक पर देख सकते हैं।

शौचालय, पेयजल केंद्र, स्वास्थ्य शिविर और पुलिस कैंप की लोकेशन भी देखी जा सकेगी। डिजिटल खोया-पाया सुविधा के जरिए लापता व्यक्ति की सूचना दर्ज कराने और जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

पिंडदानी मेले में पहुंचने से पहले ऑनलाइन पंजीकरण कर अपनी यात्रा की योजना बना सकेंगे। पर्यटन विभाग की ओर से आगंतुकों के लिए बिहार के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की यात्रा के विशेष पैकेज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

पिंडदान पैकेज और ई-पिंडदान की सुविधा भी दी जा रही है। ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से अनुष्ठान की तैयारियां पहले से की जा सकती हैं। पिंडदान पैकेज की बुकिंग के लिए tourism.bihar.gov.in वेबसाइट पर जाएं और पिंडदान पैकेज का चयन करें।

रोबोटिक साफ-सफाई

फल्गू नदी की साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखने के लिए पहली बार रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। फल्गु नदी के लिए 'क्लियरबॉट' और नालों की सफाई हेतु रोबोटिक मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है।

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