खेत से बाजार तक 'श्रीअन्न' का नया दौर: गया का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस दे रहा बिहार और देश के किसानों को नई राह
गया के मायापुर में स्थापित मिलेट सेंटर कम पानी और कम लागत में मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दे रहा है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा गया का मिलेट सेंटर। (जागरण)
HighLights
मायापुर मिलेट केंद्र मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा दे रहा।
किसानों को अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण से जोड़कर आय बढ़ा रहा।
मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया, कई राज्यों के किसान लाभान्वित।
हिमांशु गौतम, फतेहपुर। कम पानी में खेती, कम लागत और बेहतर पोषण। बदलते कृषि परिदृश्य में मोटे अनाज (मिलेट) की यही खूबियां किसानों को नई संभावनाएं दिखा रही हैं।
गया जिले के टनकुप्पा प्रखंड के मायापुर में करीब 450 एकड़ में विकसित बिहार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फार मिलेट्स वैल्यू चेन इसी बदलाव की दिशा में काम कर रहा है।
बिहार के पहले और देश के प्रमुख मिलेट केंद्रों में शामिल यह संस्थान अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पादन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को एक ही परिसर में जोड़ने की पहल कर रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर मोटे अनाज की खेती को आय के नए अवसरों से जोड़ना है।
खेतों में मिलेट की विविध प्रजातियों का परीक्षण
मायापुर केंद्र के करीब 25 एकड़ क्षेत्र में रागी, कोदो, बाजरा, कंगनी, पुटकी और सांवा सहित विभिन्न मोटे अनाज की फसलें लगाई गई हैं। अलग-अलग परिस्थितियों में इनकी उपज और अनुकूलता का अध्ययन किया जा रहा है।
हैदराबाद स्थित इक्रीसैट जुलाई 2023 से यहां मिलेट पर अनुसंधान कर रहा है। संस्थान अब तक 10 हजार से अधिक प्रजातियों पर अनुसंधान कर चुका है। बिहार की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल 36 प्रजातियों का चयन कर आगे के परीक्षण और चयन के लिए कृषि विभाग को भेजा गया है।
अनुसंधान से प्रसंस्करण तक एक परिसर में प्रशिक्षण
मायापुर में निर्मित तीन मंजिला भवन में प्रशिक्षण, आवासन और कार्यालय की व्यवस्था की गई है। केंद्र के करीब 45 एकड़ क्षेत्र में चारदीवारी, कृषि उपकरण, तालाब, भूमि समतलीकरण और जैविक उर्वरक निर्माण जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
यहां किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक तरीके से बुआई, फसल प्रबंधन, कटाई, प्रसंस्करण और बाजार से जुड़ने की तकनीक की जानकारी दी जाती है। इससे खेती के साथ मिलेट आधारित उत्पाद तैयार करने और उनका बाजार विकसित करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
श्रीअन्न में पोषण और स्वास्थ्य की संभावनाएं
मोटे अनाज को पोषण का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। रागी में कैल्शियम, जबकि विभिन्न मिलेट में फाइबर, आयरन, प्रोटीन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं।
संतुलित आहार में इनका उपयोग पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सहायक हो सकता है। यही वजह है कि श्रीअन्न को लेकर देश-दुनिया में रुचि बढ़ी है। मिलेट की विविध प्रजातियों और उनके पोषण संबंधी गुणों पर अनुसंधान से किसानों और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
मुख्यमंत्री ने किया केंद्र का उद्घाटन और अवलोकन
मायापुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की योजना और तैयारियों पर वर्ष 2022 से तत्कालीन जिलाधिकारी डा. एसएम त्यागराजन के स्तर से काम शुरू किया गया था। समृद्धि यात्रा के दौरान 20 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री ने केंद्र का विधिवत उद्घाटन और अवलोकन किया।
इससे पहले केंद्र के आनलाइन शुभारंभ का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था। इसके बाद बिहार सहित विभिन्न राज्यों से किसान, कृषि वैज्ञानिक और प्रशिक्षु यहां पहुंचकर मिलेट की खेती और प्रसंस्करण की जानकारी ले चुके हैं।
करीब 200 करोड़ की परियोजना से खेत से बाजार तक की तैयारी
करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह केंद्र केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से मिलेट की पूरी मूल्य श्रृंखला तैयार करने का लक्ष्य है।
उन्नत उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्यवर्धन के जरिए किसानों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मायापुर का यह केंद्र अब गया जिले से आगे बिहार और अन्य राज्यों के किसानों के लिए प्रशिक्षण और अनुसंधान का केंद्र बन रहा है।
पंजाब, हरियाणा, ओडिशा, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के किसान यहां पहुंच चुके हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति के पूर्व सलाहकार और 12 प्रशिक्षु आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के भी केंद्र के दौरे का उल्लेख किया गया है।
प्रतिदिन विभिन्न राज्यों से किसान मिलेट की खेती और प्रशिक्षण के लिए यहां पहुंच रहे हैं। यह गतिविधियां मोटे अनाज की खेती को खेत से बाजार तक विस्तार देने की दिशा में केंद्र की भूमिका को रेखांकित करती हैं।
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