गया जी में दिखा आस्था का अनोखा संगम, रूस-यूक्रेन-जर्मनी से पहुंचे 22 विदेशी; फल्गु तट पर किया पितरों का पिंडदान
गया जी के पितृपक्ष मेले में रूस, यूक्रेन और जर्मनी से आए 22 विदेशी श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के देवघाट ...और पढ़ें
HighLights
रूस, यूक्रेन, जर्मनी से 22 विदेशियों ने किया पिंडदान।
फल्गु नदी के देवघाट पर पितरों का तर्पण किया।
बनारस के पंडित के नेतृत्व में कर्मकांड पूरे किए।
जागरण संवाददाता, गयाजी। गया जी में चल रहे पितृपक्ष मेले में शुक्रवार को आस्था का अनूठा दृश्य देखने को मिला। रूस, यूक्रेन और जर्मनी से आए 22 विदेशी श्रद्धालुओं ने पवित्र फल्गु नदी के देवघाट पर अपने पितरों का तर्पण और पिंडदान किया। सनातन परंपरा में आस्था रखने वाले इन विदेशी मेहमानों ने विधि-विधान से कर्मकांड पूरा किया।
तीन दिनों तक पिंडवेदियों पर करेंगे कर्मकांड
विदेशी श्रद्धालु तीन दिनों तक गया जी में रहकर विभिन्न पिंडवेदियों पर पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके तहत वे गया जी के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर अपने पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करेंगे। विदेशी मेहमानों के इस धार्मिक अनुष्ठान को देखने के लिए घाट पर लोगों की भीड़ भी जुटी।
बनारस के पंडित के नेतृत्व में पहुंचे विदेशी श्रद्धालु
रूस, यूक्रेन और जर्मनी से आए इन 22 श्रद्धालुओं का नेतृत्व बनारस के पंडित लोकनाथ गौड़ कर रहे हैं। उनकी देखरेख में विदेशी मेहमान गया जी की प्राचीन पिंडदान परंपरा के अनुसार कर्मकांड कर रहे हैं।
पितृपक्ष के दौरान गया जी में विदेशियों द्वारा पिंडदान का यह दृश्य श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
यह भी पढ़ें- Gaya Pind Daan 2026: गया जी में पिंडदान कैसे करें? पूरी विधि, वेदियां; सामग्री, खर्च और जरूरी नियम
यह भी पढ़ें- जहां पितरों की विदाई पर नहीं बहते आंसू, बजती हैं तालियां और गूंजती है हंसी; गयाजी की इस वेदी का रहस्य क्या है?
