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गया में नेपाल की 'बाढ़ वाली मछली' की अफवाह बेबुनियाद, मत्स्य विभाग ने कहा- बेझिझक खाएं

Published: Sat, 12 Sep 2026 04:33 PM (GMT+05:30)

गया में नेपाल की बाढ़ से आई मछलियों की अफवाहों के बीच, जिला मत्स्य पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि ...और पढ़ें

गयाजी जिले के नादरागंज आढ़त में तालाब से आया हुआ रोहू मछली। (जागरण)

गयाजी जिले के नादरागंज आढ़त में तालाब से आया हुआ रोहू मछली। (जागरण)

HighLights

  1. गया में बाढ़ की स्थिति नहीं, नेपाल से मछली नहीं आई।

  2. जिला मत्स्य पदाधिकारी ने स्थानीय मछलियों को खाने योग्य बताया।

  3. बाढ़ के पानी से आई अज्ञात मछलियों से बचने की सलाह।

संदीप साहनी, मानपुर। बिहार के विभिन्न जिलों में नेपाल की बाढ़ के बाद नदियों में असामान्य और बड़ी मछलियां मिलने की खबरों के बीच गया जिले में भी मछली खाने वाले लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

बाजार में बिकने वाली मछलियों को लेकर लोगों में आशंका बनी हुई है। इस संबंध में जिला मत्स्य पदाधिकारी पंकज कुमार ने स्पष्ट किया है कि गया जिले में बाढ़ की कोई स्थिति नहीं है।

नेपाल से बहकर आई मछलियों के गया पहुंचने की भी कोई जानकारी नहीं है। इसलिए लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

जिला मत्स्य पदाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि गया जिले के बाजारों में विभिन्न प्रकार की मछलियां उपलब्ध हैं। यहां बिकने वाली मछलियां खाने योग्य हैं।

उन्होंने कहा कि गया में नेपाल से बहकर आई किसी मछली की सूचना नहीं मिली है। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने अपील की कि गया में उपलब्ध सामान्य मछलियों का सेवन करने को लेकर लोगों को बेवजह भयभीत होने की जरूरत नहीं है।

बाढ़ के पानी से आई अज्ञात मछलियों को नहीं खाने की सलाह

वहीं, बिहार सरकार के डेयरी, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से हाल ही में जारी एडवाइजरी में लोगों से बाढ़ के पानी से बहकर आई अज्ञात, असामान्य या अजीब दिखने वाली मछलियों को नहीं पकड़ने, नहीं खरीदने और नहीं खाने की अपील की गई है। विभाग ने ऐसी मछलियों की बिक्री से भी बचने की सलाह दी है।

गया जिले के तालाबों और जलाशयों में पाए जाने वाले प्रजातियों की मछलियां। रोहू, कतला, पोठिया, सुहिया, फांसी, फोली, धवाई, मृगल (नैनी), रेवा, कलबासु, सरना, पुटी, टिकटो, चिलवा, ओस्टियोब्रामा, बकै बोटिया, नकटी, पाबदा, बोआल, टेंगरा, अयार, रीता, पतासी, बछवा, सिंघी, मांगुर, कौवा, लोरिया, चेंगा, गरई, सौर, सौल, कुचिया, चंदा, पथरचट्टी, धेबरी, कवई, खोस्ती, बुल्ला, गइची, बाम सहित अन्य मछलियां पाई जाती है।

सरकार की ओर से जारी चेतावनी के अनुसार, नेपाल में आई भारी बाढ़ के बाद गंडक, कोसी और अन्य नदियों के रास्ते बिहार के सीमावर्ती जिलों, विशेषकर पश्चिम चंपारण और गोपालगंज में असामान्य एवं बड़े आकार की मछलियां बहकर आने की खबरें हैं।

कुछ मछलियों का वजन 10 से 90 किलो तक बताया जा रहा है। ऐसी मछलियों की प्रजाति और स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा की जानकारी स्पष्ट नहीं होने के कारण सावधानी बरतने को कहा गया है।

दूषित पानी से संक्रमण का खतरा

विभाग ने बताया कि बाढ़ का पानी गंदे नालों, सीवेज अन्य दूषित पदार्थों के संपर्क में आ सकता है। इससे मछलियों में हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस या फंगस होने का खतरा रहता है। ऐसी मछलियों के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, चक्कर आना और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे केवल पहचानी जाने वाली स्थानीय मछलियों का सेवन करें। नदी या बाढ़ के पानी में कोई अजीब मछली दिखे तो इसकी सूचना मत्स्य विभाग को दें। ऐसी मछली खाने के बाद तबीयत बिगड़ने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें।

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गया जी जिले में विभिन्न प्रजातियों की रंग-बिरंगी मछलियां उपलब्ध हैं। ये मछलियां प्रोटीन से भरपूर और पौष्टिक होती हैं। उन्होंने कहा कि मानपुर बाजार में उनके यहां बड़ी संख्या में लोग मछली खरीदने पहुंचते हैं। ग्राहकों का भरोसा उनकी दुकान की पहचान है। उन्होंने बताया कि ग्राहकों को ताजी और अच्छी गुणवत्ता वाली मछली उपलब्ध कराने का लगातार प्रयास किया जाता है, ताकि लोग संतुष्ट होकर खरीदारी कर सकें।

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विनोद साहनी, खुदरा विक्रेता, मानपुर

यहां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मछलियां खुदरा विक्रेताओं को उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने कहा कि स्थानीय मछलियां ताजा, शुद्ध और प्रोटीन से भरपूर होती हैं। इन मछलियों में किसी तरह के हानिकारक तत्व नहीं होते हैं। ग्राहकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मछलियां बेची जाती हैं। इससे लोगों को पौष्टिक और प्रोटीनयुक्त आहार उपलब्ध हो रहा है।

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 राजेश केवट मछली आढ़तिया, मानपुर

गया जी जिले में बाढ़ की स्थिति नहीं रहती है। यहां बाजार में बिकने वाली मछलियां स्थानीय तालाबों की हैं। उन्होंने बताया कि गया की मिट्टी और पानी में पली मछलियां काफी फायदेमंद और लाभदायक होती हैं। यहां जानी-पहचानी प्रजातियों की मछलियां ही मिलती हैं। स्थानीय तालाबों से आने वाली मछलियों की गुणवत्ता बेहतर होती है।

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विक्की साहनी मछली विक्रेता, मानपुर

आढ़त में सभी मछलियां जानी-पहचानी आती हैं। उन्होंने बताया कि ग्राहकों को बिक्री के लिए स्वस्थ मछलियां उपलब्ध कराई जाती हैं। आढ़त में आने वाली मछलियां स्वास्थ्य के लिए लाभदायक और फायदेमंद हैं। उन्होंने कहा कि मछली विक्रेताओं को भी स्वस्थ मछली ही दी जाती है, ताकि ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण मछली मिल सके।

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सिकंदर केवट मछली आढ़तिया, मानपुर

कई वर्षों से मछली कुजापी व डेल्हा पर बेचते आ रहे हैं। गया में बिकने वाली मछलियां स्थानीय हैं, बाहरी नहीं। उन्होंने कहा कि यहां बिकने वाली मछलियां खाने योग्य और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं। बाजार में जानी-पहचानी प्रजातियों की मछलियां ही बिक रही हैं। लोगों को मछली खरीदने और खाने में किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

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अरुण निषाद मछली विक्रेता, कुजापी

गया जिले के बाजारों में नेपाल में आई बाढ़ की मछलियां उपलब्ध नहीं हैं। गया और नेपाल के बीच करीब 500 किलोमीटर की दूरी है, जिसके कारण वहां से मछलियों के यहां आने की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि गया जिले में बिकने वाली मछलियां जाने-पहचाने स्रोतों से आती हैं और खाने योग्य हैं। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।

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राजकिशोर साहनी मछली आढ़तिया, नादरागंज गयाजी