सात समंदर पार से गयाजी पहुंचे पिंडदानी, विदेशी महिलाओं ने वैदिक मंत्रों के बीच किया पिंडदान
विदेश में रह रहे सनातनियों के बीच गयाजी में पिंडदान और कर्मकांड की परंपरा अत्यधिक लोकप्रिय हो रही है। रूस, ...और पढ़ें

गयाजी के देवघाट पर पिंडदान करतीं विदेशी पिंडदानी महिलाएं। जागरण
जागरण संवाददाता, गयाजी। गयाजी में पिंडदान और कर्मकांड की परंपरा विदेश में रह रहे सनातनियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय हो रही है।
गयाजी, जो कि हिन्दू धर्म में पितरों की आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है, वहां पिंडदान करने का महत्व विशेष रूप से बढ़ गया है।
यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर भी है, जहां वे अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
22 विदेशी आए पिंडदान करने
विदेश में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोग, विशेष रूप से रूस, यूक्रेन और जर्मनी से 22 विदेशी पिंडदानी गयाजी आएं।
गयाजी में पिंडदान करने का यह अवसर उन्हें अपने सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों से जुड़ने का एक अनूठा मौका प्रदान करता है।
शुक्रवार को विदेशी महिला पिंडदानी गयाजी पहुंचीं। पूरे वैदिक मंत्रोच्चारण और सनातनी पद्धति से गयाजी के देवघाट पर पिंडदान व कर्मकांड किया।
पिंड अर्पित कर दी जलांजलि
उसके बाद पवित्र फल्गु नदी में पिंड को अर्पित करते हुए जलांजलि दी। वे सभी तीन दिनों तक गयाजी में रहकर कर्मकांड व पिंडदान करेंगी।
विदेश में रहने वाले भारतीयों को गयाजी आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही, पिंडदान की विधि और महत्व के बारे में जानकारी भी दी जा रही है।
गयाजी में पिंडदान करने का एक और पहलू यह है कि यह प्रक्रिया न केवल व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामूहिक रूप से भी परिवारों को एकजुट करने का कार्य करती है।
जब परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, तो यह उनके बीच के बंधन को और मजबूत बनाता है।
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