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गया । एक सप्ताह के दौरान आग से करीब पांच सौ एकड़ में लगी गेहूं की फसल नष्ट हो जाने के कारण किसानों को पचीस लाख से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।

बेलागंज, वजीरगंज, परैया, टिकारी आदि क्षेत्रों में आगजनी की भीषण घटनाएं हुई हैं। किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं। वजीरगंज में सोमवार को सड़क जाम भी किया था। ज्यादातर मामलों में बिजली का तार टूटकर गिरने के कारण आग की शिकायत आ रही है। यह भी कि खेतों से गुजरे हाईटेंशन विद्युत तार में गार्ड वायर नहीं है। सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं किए जाने का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। जिस फसल के बूते किसानों ने कई सपने सजा रखे थे, वे आग की लपटों में स्वाहा हो गए। एक तो बारिश नहीं होने के कारण धान की पैदावार नहीं हुई, गेहूं से उम्मीद थी तो वह आग की भेंट चढ़ गया। गर्मी के दिनों में ऐसी घटनाएं हर साल होती हैं, पर इस बार कुछ ज्यादा ही है। आग बुझाने के लिए पर्याप्त संसाधनों का भी अभाव है। ग्रामीण इलाकों में दमकल की गाड़ियां नहीं हैं। सूचना मिलने के बाद जब तक अग्निमशन दल पहुंचता है, एकड़ के एकड़ खेत में लगी फसल खाक हो चुकी होती है।

विद्युत तार टूटने के कारण हो रही घटनाओं पर साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के ग्रामीण क्षेत्र के कार्यपालक अभियंता ललित कुमार कहते हैं कि तार की चिनगारी से फसल जलने की सूचना नहीं है। फिलहाल विभाग के कनीय अभियंता द्वारा जर्जर तार की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। जहां तक तार के नीचे गार्ड वायर लगाने की बात है तो यह सिर्फ भीड़ वाले इलाके में लगाने की व्यवस्था है, ताकि तार टूटकर गिरता है, तो गार्ड पर रोका जा सके। इधर, पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी, काग्रेस के जिलाध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद यादव, सत्येंद्र कुमार आदि ने मंगलवार को आग से पीड़ित बाड़ा के रहीम बिगहा, पंाचू बिगहा एवं तक्या में किसानों से मुलाकात की।

Posted By: Jagran

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