यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 11, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
देवकुंड धाम को अरवल जिले में शीघ्र शामिल करने की मांग
औरंगाबाद। अरवल बसपा जिलाध्यक्ष मनोज सिंह यादव ने कहा कि भौगोलिक ²ष्टिकोण से पूरी तरह देवकुंड धाम अरवल जिले पर ...और पढ़ें

औरंगाबाद। औरंगाबाद व अरवल जिले की सीमा पर स्थित अति प्राचीन स्थल देवकुंड धाम कई वर्षों से गलत सीमांकन के वजह से उपेक्षित है। उक्त बात देवकुंड मठाधीश कन्हैया नंद पुरी ने कही। रविवार को देवकुंड मंदिर परिसर में औरंगाबाद जिला के द्वारा विकास में उपेक्षित देवकुंड धाम को अरवल जिला में समाहित करने व धाम के विकास संबंधी तथ्यों पर विचार विमर्श के लिए बैठक का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता मठाधीश कन्हैया नंद पुरी व संचालन पूर्व मुखिया रामकृपाल विश्वकर्मा ने किया।
अरवल बसपा जिलाध्यक्ष मनोज सिंह यादव ने कहा कि भौगोलिक ²ष्टिकोण से पूरी तरह देवकुंड धाम अरवल जिले पर यह निर्भर है। देवकुंड बाजार के चारों तरफ का क्षेत्र अरवल जिले से घिरा हुआ है। लेकिन, औरंगाबाद जिले का अंग होने के कारण यहां न तो इस जिले की पुलिस सुरक्षा व्यवस्था कर पाती है और न ही जिला प्रशासन विकास कार्यों के में दिलचस्पी लेती है। कहा कि प्रखंड, अनुमंडल एवं जिला संबंधित कार्यों के लिए उन्हें लंबी दूरी तय करना पड़ता है। जबकि अरवल जिला यहां से मात्र 23 किलोमीटर दूर स्थित है। जिला मुख्यालय औरंगाबाद से 60 किलोमीटर, अनुमंडल दाउदनगर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी होने के कारण वरीय अधिकारी इलाके का जायजा लेना मुनासिब नहीं समझते हैं। जिसका असर विकास पर पड़ रहा है, जबकि यहां विकास के लिए सभी तरह के संसाधन मौजूद हैं। इतने संसाधन के बावजूद भी देवकुंड का विकास अवरुद्ध है जो चिता का विषय है। सभी ने देवकुंड धाम को अरवल जिला में शीघ्र शामिल करने की मांग की। इस मौके पर हथियारा मुखिया विनोद मेहता, सरपंच नरेश साव, राजद नेता श्याम सुंदर, पैक्स अध्यक्ष उमाशंकर यादव, पूर्व मुखिया राजेश्वर सिंह, शिक्षक राकेश रंजन, भाकपा नेता कृष्ण नंदन सिंह, श्रीकांत चंद्रवंशी, अक्षय पटेल सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे।
