गया [विनय कुमार पांडेय]। कोरोना संकट ने ऐसी तबाही मचाई है कि भारतीय पर्व-त्योहार, सामाजिक रीति-रिवाज और परंपराएं भी प्रभावित हो गई हैं। हिंदू सनातन परंपरा में मार्च से जून तक का समय शादी विवाह समेत अनेक शुभ कार्यों के लिए उपर्युक्त माना गया है, लेकिन 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद से सबकुछ प्रभावित होकर रह गया है। शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य भी कोरोना की चपेट में हैं। वर-वधू पक्ष के अभिभावक परेशान हैं। टेंशन में साजन-सजनी भी हैं। एक-दूसरे से मिलने का नजदीक आता हुआ समय लॉकडाउन-2 के साथ ही दूर हो गया है। यह भी पता नहीं कि अब आगे क्या होगा?

तिलक-विवाह की रस्मों से जुड़े कारोबारियों के चेहरे पर मायूसी

समय से तिलक, फलदान, वरमाला, शादी जो होना था वह नहीं हो रहा है। इन रस्मों-रिवाज से जुड़े कारोबार पर भी बुरा असर पड़ा है। होटल, डेकोरेशन, बाजा-लाइट, क्रॉकरी, डीजे, फूल-माला से लेकर वाहन सबका कारोबार ठप है। करीमगंज, गया के नेशनल क्रॉकरी डेकोरेशन के मालिक टोनी बैंकों से कर्ज लेकर रोजगार कर रहे हैं। इनकी तकलीफ है कि बुकिंग तो कैंसिल हो ही रहे हैं, बैंक का ब्याज भी बढ़ता जा रहा है। गुरारू बाजार के शंभु कुमार गुप्ता टेंट-लाइट का कारोबार करते हैं। कहते हैं कि एक लाख का सामान इस बार लग्न के लिए मंगाया था। पंूजी भी फंस गई। बुकिंग भी धड़ाधड़ कैंसिल हो रही हैं। 

शुभ लग्न में शादी नहीं होने से चिंतित दिख रहे ब्राह्मण-पुरोहित

-खिजरसराय प्रखंड अंतर्गत बिहटा गांव के आचार्य परमानंद पांडेय ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से शादी विवाह वाले घरों की परेशानी बढ़ गई है। समय टलने से सबकुछ प्रभावित हो रहा है। अप्रैल, मई में शादी की कई शुभ तिथियां हैं। लेकिन सब टलते जा रहे हैं। वागेश्वरी के राजेश कुमार मिश्रा समाज के सभी तबकों को इस कोरोना से नुकसान की बात कहते हैं। अप्रैल में 20 व 30 को गृह प्रवेश का समय भी प्रभावित हुआ। मई में अनेक यजमान के यहां शादी के लिए जाना था। सबकुछ प्रभावित हो गया। एक जुलाई के बाद गुुरु के अस्त होने से शादी-विवाह जैसे शुभ कार्य नहीं हो पाएंगे। कार्तिक में जेठान से फिर शुभ कर्म शुरू हो पाएंगे।

अप्रैल, मई व जून में विवाह की शुभ तिथियां

अप्रैल- 20, 21, 25, 26, 27

मई-1, 4, 8, 10, 13, 17, 18, 24

जून- 14, 19, 24, 25, 28, 30 

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Posted By: Rajesh Thakur

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