जागरण संवाददाता, मानपुर (गया)। पितृपक्ष शुरू होते ही देश-विदेश के लोग गया में पिंडदान के लिए पहुंचने लगे। श्रद्धालु विष्णुपद, फल्गु सहित अन्य स्थानों पर पिंडदान कर सीताकुंड में पहुंचते, जहां फल्गु की रेत का पिंड बनाकर कर्मकांड के साथ पिंडदान किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार- बात त्रेता युग की है, जिसका उल्लेख आनंद रामायण में वर्णित है। राजा दशरथ की मृत्यु की पहली पुण्यतिथि  पर पिंडदान के लिए भगवान राम, माता सीता व लक्ष्मण गया जी पहुंचे थे, जो आज सीताकुंड के नाम से चर्चित है। वहीं उक्त तीनों ने डेरा डाला था। पिंडदान कराने के लिए ब्रहामण को बुलाया गया। पिंडदान की सामग्री लाने भगवान राम व लक्ष्मण बाजार गए। पिंडदान का मुहूर्त हो गया था। इसी बीच राजा दशरथ का हाथ फल्गु में दिखाई दिया और आवाज आई कि पिंडदान करो, अन्यथा हम लुप्त हो जाएंगे। श्रीराम के आने में विलंब होता देख माता सीता ने फल्गु के रेत का पिंड बनाकर कर्मकांड के साथ पिंडदान किया। जो आज सीताकुंड वेदी के नाम से जानी जाती है। जहां फल्गु की रेत के पिंड बनाकर पिंडदान किया जाता है।

जानें राम गया वेदी की महिमा

माता सीता द्वारा पिंडदान करने की बात सुनकर भगवान श्रीराम काफी क्रोधित हुए। उन्होंने जौ का आटा व अन्य सामग्री का पिंड बनाकर पिता राजा दशरथ का पिंडदान कर्मकांड के साथ किया। जो आज राम गया वेदी के नाम से जानी जाती है, जहां आज भी लोग जौ का आटा व अन्य सामग्री का पिंड बनाकर पिंडदान करते हैं। उक्त वेदी तक पहुंचने के लिए सीताकुंड मुख्य गेट से जाने के बाद पत्थर की सीढ़ी चढऩे के बाद पूर्व दिशा की ओर मुड़ जाएं। वहीं पर राम गया वेदी है, जहां श्रद्धालु पिंडदान करने के बाद पिंड को अर्पित करने पहुंचते हैं।

चकाचक सीताकुंड देख प्रसन्न हुए श्रद्धालु

सीताकुंड का सुंदरीकरण देख पिंडदान करने आए श्रद्धालु काफी प्रसन्न हैं। पठानकोट से आए राजकुमार व रानी ने कहा कि सीताकुंड काफी चकाचक बना है। यहां किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई। भोपाल से आए अभय ङ्क्षसह का कहना है कि सीताकुंड में सफाई की व्यवस्था काफी अच्छी है। यहां तनिक भी गंदगी नहीं दिखती। मध्य प्रदेश से आए अशोक पांडेय का कहना है कि सीताकुंड के समीप पिंडदान करने के दरम्यान कड़ाके की धूप से वृद्ध को छाया से काफी राहत मिलती है, लेकिन विष्णुपद के समीप फल्गु में कड़ाके की धूप से काफी कष्ट झेलना पड़ता है। यहां प्रशासन या नगर निगम द्वारा छाया की व्यवस्था करने की जरूरत है, ताकि पिंडदान करने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिले।

Edited By: Prashant Kumar