यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 17, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सनातन धर्मावलंबियों में आक्रोश, जंक्शन पर विष्णु के चरण चिह्न क्यों नहीं
गया जंक्शन पर हो रहे सुंदरीकरण कार्य की सभी ने सराहना की है लेकिन वहां उकेरी जा रही है।

गया। गया जंक्शन पर हो रहे सुंदरीकरण कार्य की सभी ने सराहना की है, लेकिन वहां उकेरी जा रही कलाकृतियों में विष्णु चरण और विष्णुपद के नहीं होने से नाराजगी भी है। इस पर शहर के विभिन्न मंदिरों के पुजारी आदि ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि गयाजी की पहचान यहां की सनातन आस्था से जुड़ा विष्णुपद और भगवान विष्णु के चरण चिह्न हैं। इसका वर्णन पुराणों में है। हजारों वर्षो की सनातन परंपरा और विश्वास ही गयाजी की पहचान है। जंक्शन पर इसे उद्धृत किया जाना चाहिए, अन्यथा वे आंदोलन को विवश होंगे।
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गया जंक्शन पर सिर्फ बोधगया को महत्व दिया जा रहा है, जबकि गयाजी मोक्ष की नगरी है। यहां श्री विष्णु चरण, विष्णुपद की भी कलाकृति उकेरी जाए। ऐसा नहीं होता है तो यह सनातन धर्म तथा पुराणों में वर्णित प्राचीनतम गयाजी की उपेक्षा होगी, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
राम लखन पांडेय,पुजारी ओवा माई मंदिर बिसार तालाब गया
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पूरे विश्व के सनातन धर्मावलंबियों के लिए गया मोक्ष भूमि है। उनके लिए मात्र गया नहीं, बल्कि गयाजी है। ऐसे में गया स्टेशन के सुंदरीकरण में भगवान विष्णु के चरण चिह्न और विष्णुपद को स्थान नहीं देना चिंता का विषय है। रेल प्रशासन इसमें तत्काल सुधार करे।
अंनत मराठे, पुजारी भैरो स्थान मंदिर गोदावरी,गया
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गया पूरे विश्व में सनातन धर्मियों के बीच विष्णुनगरी के रूप में विख्यात है। गया से बोधगया है, न कि बोधगया से गया है। सनातन काल से गया विष्णु भूमि रही है। ऐसे में विष्णुपद और विष्णु चरण की उपेक्षा कर सनातन धर्मियों की भावना को आहत किया जा रहा है।
दिवाकर गिरी, पुजारी मार्कंडेय शिव मंदिर गया
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विष्णु पादो विजयते गया मोक्ष भूमि है। इसकी प्रधानता विष्णु चरण से है। पूरे विश्व से प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु तीर्थयात्री गया पूर्वजों के तर्पण के लिए आते हैं। अगर उन्हें गया जंक्शन पर विष्णु चरण ही नहीं दिखें तो इसका क्या मतलब है। रेल प्रशासन को इस पर ध्यान दे। यह आस्था और शहर की पहचान का सवाल है।
पंडित विष्णु बाबा पुजारी, पुंडरी काक्ष मंदिर भष्मकुंड पर्वत गया
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प्रत्येक महत्वपूर्ण स्थल पर स्टेशन की अनुकृति उस स्थल की महत्ता को लेकर होती है। गयाधाम का महत्व पूरे विश्व के सनातन धर्मियों के बीच है। उनकी भावना को उपेक्षित किया गया है। स्टेशन पर भगवान विष्णु का चरण चिह्न नहीं उकेरा गया। जब सुंदरीकरण हो रहा है तो यहां के पौराणिक महत्व का ख्याल रखना चाहिए।
विपिन कुमार गिरी पुजारी, मां मंगला गौरी मंदिर गया
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पूरे विश्व से सनातन तीर्थयात्री गयाधाम भगवान विष्णु के चरण और विष्णुपद के दर्शन के लिए आते हैं। ऐसे में गया जंक्शन पर गया की महत्ता को दर्शाना चाहिए। गया के लिए गया की प्रधानता भगवान विष्णु से है। रेल प्रशासन इसे सुधार कर मुख्य रूप से विष्णु चरण और विष्णुपद को अंकित करे।
केदार झा, पुजारी पितामहेश्वर व शीतला मंदिर गया
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रेलवे को गयाधाम आने वाले श्रद्धालु तीर्थयात्रियों से करोड़ों की आय टिकट के रूप में होती है। गया पहुंचने के बाद श्रद्धालु गया स्टेशन की भूमि को प्रणाम कर आगे बढ़ते हैं, क्योंकि उनके कदम भगवान विष्णु की नगरी पर पड़ते हैं। लेकिन करोड़ों श्रद्धालुओं की भावना को दरकिनार कर स्टेशन की बाहरी दीवारों पर इसे से ही गायब कर दिया गया है।
नागेंद्र कुमार मिश्र पुजारी, मां बगला स्थान मंदिर गया
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रेलवे ने सनातन आस्था की उपेक्षा की है। यह ध्यान रहे कि गयाधाम परम पावन श्री हरि विष्णु की नगरी है। इसी से इसकी पहचान है। उनकी उपेक्षा का रेल विभाग अन्याय कर रहा है। वहां सिर्फ बौद्ध धर्म से संबंधित कलाकृति उकेरे जाने का क्या मतलब है। मोक्ष की भूमि कहां गई? रेलवे इसे तत्काल रोके और गया स्टेशन को विष्णुमय करे।
उदय नारायण मिश्र पुजारी, मां दु:खहरणी मंदिर गया
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रेलवे का यह कार्य गयाजी और सनातन आस्था की उपेक्षा है। पूरे विश्व में सनातन धर्मियों के बीच गया विष्णु नगरी के रूप में विख्यात है। लेकिन स्टेशन का सुंदरीकरण हो रहा है तो भगवान विष्णु ही वहां नहीं हैं। इसे तत्काल दुरुस्त किया जाए, अन्यथा सनातन धर्मावलंबी उग्र आंदोलन करेंगे।
आनंद शंकर पांडेय पुजारी, श्री भैरव मां अंबे मंदिर गोलपत्थर गया
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विष्णुपद और फल्गु की वजह से गयाधाम पूरे विश्व में सनातनधर्मियों के लिए परम आदरणीय है। पूरी धरती पर मोक्ष भूमि मात्र गयाजी ही है। यहां साक्षात श्रीहरि के चरण चिह्न हैं। ऐसे में रेलवे द्वारा सनातन धर्मियों की भावना की उपेक्षा अत्यंत निंदनीय है। गया जंक्शन पर अविलंब विष्णु भगवान का चरण चिह्न और विष्णुपद का चित्र उकेरा जाना चाहिए।
जर्नाधन पांडे पुजारी, बागेश्वरी मंदिर गया
