गया में 1670 एकड़ पर बन रहा औद्योगिक कॉरिडोर, 1339 करोड़ होंगे खर्च; 1 लाख रोजगार की उम्मीद
गया के डोभी में अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना का काम तेजी से चल रहा है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना ₹1339.02 करोड़ की लागत से 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है।

कॉरिडोर क्षेत्र में बनाया गया हेलीपैड। जागरण
HighLights
डोभी, गया में अमृतसर-कोलकाता कॉरिडोर का निर्माण तेज गति से।
परियोजना से क्षेत्र में एक लाख प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
1670 एकड़ भूमि पर बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है।
संवाद सूत्र, डोभी (गया)। गया जिले के डोभी प्रखंड में प्रस्तावित अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
करीब 1670 एकड़ जमीन के समतलीकरण का काम शुरू हो गया है। वहीं, परियोजना स्थल पर मिक्सर प्लांट और गेस्ट हाउस का निर्माण कराया जा रहा है।
एक हेलीपैड भी बनाया जा चुका है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के विकसित होने से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
भारत सरकार की इस परियोजना का विस्तार डोभी प्रखंड की खरांटी पंचायत के 13 राजस्व गांवों में है। इनमें मंगरुचक, बरिया, गंजीचक, खरांटी, सुगासोत और मंझौली सहित अन्य गांव शामिल हैं।
तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य, 1339 करोड़ रुपये होगी लागत
परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1339.02 करोड़ रुपये है। इसका निर्माण कार्य तीन अप्रैल 2026 को शुरू हुआ है और इसे दो अप्रैल 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना के लिए अब तक 1670.22 एकड़ जमीन का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। वहीं, वन विभाग की करीब 1300 एकड़ जमीन का हस्तांतरण भी कराया गया है।
भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और विभिन्न विभागों से आवश्यक स्वीकृतियां भी प्राप्त हो गई हैं। पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में सहूलियत हुई है।
कॉरिडोर के आसपास अतिरिक्त जमीन की भी तलाश की जा रही है, ताकि भविष्य में परियोजना का विस्तार किया जा सके।
एक लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद
औद्योगिक कॉरिडोर के विकसित होने से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ करीब एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है।
इससे रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर होने वाले पलायन को कम करने में मदद मिल सकती है। परियोजना के कारण स्थानीय व्यापार, परिवहन, वेयरहाउसिंग और अन्य सहायक व्यवसायों के विस्तार की भी संभावना है।
औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने से आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
एनएच-19 और एनएच-22 से जुड़ेगा औद्योगिक कॉरिडोर
परियोजना को सड़क, रेल, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। परियोजना स्थल से जीटी रोड यानी एनएच-19 और एनएच-22 की दूरी करीब सात किलोमीटर बताई गई है।
दोनों राष्ट्रीय राजमार्गों से संपर्क स्थापित करने के लिए नई सड़कों का निर्माण प्रस्तावित है। इनमें एक मुख्य सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।
कॉरिडोर को वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे से भी जोड़ने की योजना है। भविष्य में माल ढुलाई को सुगम बनाने के लिए रेलवे साइडिंग और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
हाल ही में सचिव कुंदन कुमार ने परियोजना स्थल का दौरा कर निर्माण कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने गेस्ट हाउस, हेलीपैड और एनएच-19 तक बनाई जा रही सड़क की प्रगति का निरीक्षण किया।
162 एमवीए क्षमता का बिजली ट्रांसमिशन सिस्टम
औद्योगिक इकाइयों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए 162 एमवीए क्षमता का विद्युत ट्रांसमिशन सिस्टम स्थापित करने की योजना है।
इसके लिए बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के माध्यम से व्यवस्था की जा रही है।
परियोजना में जलापूर्ति और अपशिष्ट जल के उपचार की भी व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके लिए कुल 37.41 एमएलडी पानी की आवश्यकता का आकलन किया गया है।
इसमें 14.02 एमएलडी औद्योगिक उपयोग और 6.36 एमएलडी घरेलू उपयोग के लिए निर्धारित है। अपशिष्ट जल के उपचार के लिए 14.50 एमएलडी क्षमता के दो कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे।
इसके अलावा, ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए 34 टन प्रतिदिन क्षमता का सिस्टम विकसित किया जाएगा। शोधित जल के पुनः उपयोग की व्यवस्था भी होगी।
55 प्रतिशत जमीन पर लगेंगी औद्योगिक इकाइयां
औद्योगिक कॉरिडोर की कुल भूमि में 55 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक इकाइयों के लिए निर्धारित किया गया है। वहीं, 18 प्रतिशत भूमि सड़क और पार्किंग तथा 20.30 प्रतिशत हरित क्षेत्र के लिए रखी गई है।
यहां फूड प्रोसेसिंग, तकनीकी उपकरण निर्माण, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और पैकेजिंग जैसी गतिविधियों से जुड़ी औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की योजना है। इसके साथ ही कौशल विकास केंद्र, अस्पताल, होटल और अन्य सामुदायिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
इन सुविधाओं के विकसित होने से डोभी और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक आधारभूत संरचना मजबूत होने तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।
