संवाद सूत्र, भगवानपुर: भगवानपुर अधौरा सड़क पर लोहंदी नदी के समीप धरती माता का मंदिर स्थित है। जहां पूरे वर्ष लोग आस्था व विश्वास के साथ दर्शन पूजन करने आते हैं। बताया जाता है कि धरती माता के मंदिर में पाठी की बली की परंपरा है। माता के समक्ष पाठी की बली चढ़ाकर प्रसाद स्वरूप खाने की भी परंपरा चली आ रही है। धरती माता के पास चढ़ाई गई चुनरी साड़ी श्रृंगार का सामान वहीं छोड़ देने की भी परंपरा है। सालों भर धरती माता के मंदिर में दूर-दूर से लोग दर्शन पूजन करने आते हैं।

चैत्र व शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया जाता है। सबसे बड़ी खासियत है कि हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग वहां दर्शन पूजन करने जाते हैं। आज तक धरती माता के दरबार में जो भी श्रद्धालु श्रद्धा भक्ति के साथ आया हैं मां ने उनकी मनोकामना पूरी की है। 

धरती माता मंदिर के कई अद्भुत किस्से हैं मशहूर

माता की शक्ति के कई ऐसे अद्भुत चमत्कार देखने व सुनने को मिले है जिसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता है। क्योंकि कई छोटे-छोटे बच्चे जो बीमार थे और जिनको चिकित्सक ने घर ले जाने के लिए कहा, लेकिन परिजनों ने घर न ले जाकर धरती माता के मंदिर में बच्चों को ले गए। जो आज तक पूरी तरह से स्वस्थ हैं। हालांकि दैनिक जागरण इन बातों की पुष्टि नहीं करता। ये लोगों की आस्था हो सकती है।

धरती माता मंदिर के पुजारी के अनुसार सैकड़ों साल पहले मंदिर के आस-पास स्थापित था कोई गांव  

मंदिर के पुजारी बाल्मिकी चौबे ने बताया कि जिस जगह पर धरती माता का मंदिर बना है वहां सैकड़ों साल पहले कोई गांव स्थापित था। गांव में धरती माता का स्थान था। प्राकृतिक आपदा के चलते गांव के सभी लोग गांव छोड़कर भाग गए। लेकिन धरती माता का स्थान जस का तस रह गया। माता के द्वारा कुछ भक्तों को स्वपन दिखाया गया कि तुम लोग आकर यहां मंदिर का निर्माण करो। सभी भक्तों ने मिलकर मंदिर का निर्माण कराया। जहां सालों भर लोग मां का दर्शन पूजन करने आते हैं। 

Edited By: Prashant Kumar Pandey