भभुआ, जागरण संवाददाता। जिला में मातृ मृत्यु दर कम करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई गंभीर प्रयास किए गए हैं। गर्भकाल में रक्‍त की कमी और प्रसव के वक्‍त अत्यधिक रक्तस्राव होना मातृ मृत्यु दर अधिक होने की सबसे बड़ी वजह है। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं के स्‍वास्‍थ्‍य प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। मातृ मृत्यु दर के विभिन्न कारणों जैसे  गर्भकाल में रक्‍त की कमी और प्रसव के वक्‍त अत्यधिक रक्तस्राव, ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत आदि को लेकर जिला एवं विभागीय स्तर पर इनकी व्यवस्था को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं।

38 प्रतिशत मातृ मृत्यु का कारण अत्यधिक खून का बहना:

गर्भावस्‍था के दौरान खून की कमी व प्रसव में अत्यधिक खून का बहना मातृ मृत्यु का एक महत्वपूर्ण कारक है। 38 प्रतिशत माताओं की मृत्यु का कारण रक्तस्राव होना है जबकि 11 प्रतिशत मातृ मृत्यु संक्रमण और 8 प्रतिशत मातृ मृत्यु गर्भपात के कारण होते हैं। गर्भावस्था के दौरान खून बहने के कई कारण होते हैं जिनमें प्रसव पश्चात अत्यधिक रक्तस्राव होना, गर्भाशय का प्लासेंटा से अलग हो जाना, गर्भाश्य का फट जाना, सर्जरी के दौरान अनियंत्रित खून का बहना व रक्त का थक्का जमने जैसे विकार शामिल हैं।

गंभीर एनीमिया प्रभावित गर्भवती का ब्लड ट्रांसफ्यूजन जरूरी

ब्लड ट्रांसफ्यूजन तब किया जाता है जब एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर से 25 प्रतिशत या अधिक मात्रा में खून नहीं रहता है। यदि यह स्थिति गर्भवती महिला के साथ है तो अधिक रक्तस्राव के कारण उसे हीमोरेजिक शॉक हो सकता है। इस स्थिति में उसके शरीर को आवश्यक मात्रा में आक्सीजन मिलना बंद हो जाता है। वहीं एनीमिया ग्रसित गर्भवती महिलाओं के सीजेरियन सर्जरी के समय ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता होती है। गंभीर रूप से एनीमिया ग्रसित महिला को भी ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है।

 

Edited By: Sumita Jaiswal