जेएनएन, औरंगाबाद। स्कूली बच्चों की सेहत को लेकर जांच कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय व मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से स्कूली बच्चों में स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी जागरूकता लाने की योजना बनी है। विद्यालय स्तर पर स्वास्थ्य गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने इस बारे में पत्र जारी किया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी पत्र दिया गया है।

स्कूलों में दो नामित शिक्षक बनेंगे हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर

कार्यक्रम के तहत प्रत्येक विद्यालय से दो शिक्षकों जिनमें एक महिला व एक पुरुष शामिल होंगे, उन्हें हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसेडर के रूप में नामित किया जाएगा। इन्हें स्वास्थ्य संबंधी अच्छे व्यवहारों को अपनाने और बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक कक्षा से दो नामित छात्र इन स्वास्थ्य संवर्धक संदेशों को समाज तक पहुंचाने के लिए हेल्थ एंड वेलनेस मैसेनजर के रूप में काम करेंगे।

स्कूली बच्चों को बीमारियों से बचाव की मिलेगी जानकारी

स्कूलों में प्रत्येक बुधवार हेल्थ एंड वेलनेस डे के रूप में मनाया जाएगा। स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां प्रदान करने व व्यवहार परिवर्तन की दिशा में सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चों को दो श्रेणियों में बांट कर विभिन्न प्रकार की गतिविधियों का आयोजन किया जाना है. इनमें 6 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए प्रमुख गतिविधियों में विभिन्न बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष शिक्षा दी जाएगी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मोबाइल टीम के माध्यम से समस्याओं की पहचान व समाधान , साप्ताहिक आयरन व फॉलिक एसिड अनुपूरण कार्यक्रम व राष्ट्रीय कृमि दिवस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को आइएफए एवं एल्बेंडाजोल की गोलियों का सेवन सुनिश्चित कराया जाएगा।स्कूली छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।

निजी विद्यालय व मदरसा में भी होगा कार्यक्रम

निजी विद्यालयों व मदरसा में पंजीकृत 5 से 19 साल के सभी विद्यार्थियों के लिए साल में दो बार एल्बेंडाजोल की एक गोली का सेवन कराने, स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रति जागरूकता लाने का भी काम किया जाएगा।  साथ ही डायरिया की रोकथाम के लिए हाथों की सफाई पर बल -बच्चों में डायरिया से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी देते हुए इस रोग के प्रभाव को लेकर आम जनमानस में जागरूकता लायी जानी है। जिला शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के सहयोग व समन्वय स्थापित कर दस्त नियंत्रण पखवाड़ा का आयोजन होगा। बच्चों को हाथ धोने के तरीकों के बारे में बताया जाएगा। दस्त नियंत्रण के लिए ओआरएस व ¨जक के उपयोग के प्रति भी जानकारी दी जायेगी।

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