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जन्म एक दिन, विदाई भी एक साथ: तालाब में डूबने से 2 सहेलियों की मौत, एक ही कब्र में दफनाया गया

Published: Sun, 13 Sep 2026 11:38 PM (IST)Updated: Sun, 13 Sep 2026 11:41 PM (IST)

गया के नवाबचक गांव में 13 साल की दो सहेलियां सुहानी और सुप्रिया स्कूल से लौटते समय आहार (तालाब) में डूब गईं।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

HighLights

  1. गया के नवाबचक गांव में दो सहेलियां आहार में डूबीं।

  2. 13 साल की सुहानी और सुप्रिया की दोस्ती अटूट थी।

  3. अलग पृष्ठभूमि के बावजूद, उन्हें एक ही कब्र में दफनाया गया।

संवाद सूत्र, गुरुआ (गया)। 13 साल की उम्र में दो सहेलियों की दोस्ती ने ऐसी अंतिम कहानी लिख दी, जिसे नवाबचक गांव शायद ही कभी भूल पाएगा।

गुरुआ प्रखंड की सिमारु पंचायत के नवाबचक गांव की सुहानी कुमारी और सुप्रिया कुमारी बचपन से एक-दूसरे की हमसफर थीं।

संयोग ऐसा कि दोनों का जन्म भी एक ही दिन हुआ था। साथ बड़ी हुईं, साथ पढ़ीं और जिंदगी के 13 साल एक-दूसरे का हाथ थामकर गुजार दिए। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि उनकी अंतिम विदाई भी एक साथ होगी।

सुहानी किसान अमरेंद्र यादव की पुत्री थी, जबकि सुप्रिया मनोज चौधरी की बेटी थी। दोनों के घर आसपास थे। मध्य विद्यालय तरोवा में दोनों सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं।

स्कूल जाने से लेकर घर लौटने तक दोनों अक्सर साथ रहती थीं। पढ़ाई हो या गांव की गलियां, दोनों की दोस्ती हर जगह दिखाई देती थी। स्वजन बताते हैं कि दोनों को एक-दूसरे से अलग देखना मुश्किल था।

स्कूल से लौटते समय बदल गई जिंदगी

हादसे वाले दिन भी दोनों सहेलियां रोज की तरह स्कूल से पढ़ाई कर घर लौट रही थीं। इसी दौरान आहार में डूबने से दोनों की मौत हो गई। कुछ ही देर में गांव में खबर फैली और दो परिवारों की खुशियां मातम में बदल गईं।

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सुप्रिया कुमारी और सुहानी कुमारी की फाइल फोटो।

जिस रास्ते पर दोनों सहेलियों की साथ चलने की आदत थी, वही रास्ता परिवारों को ऐसी खबर तक ले आया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।

पिता मनोज चौधरी बेटी को याद कर भावुक हो जाते हैं। उनके लिए सुप्रिया सिर्फ बेटी नहीं, घर की खुशियों का केंद्र थी। वहीं सुहानी के परिवार के लिए भी यह सदमा शब्दों से परे है। दोनों परिवारों के घरों में तीन दिन बाद भी सन्नाटा पसरा है।

अलग सामाजिक पृष्ठभूमि, लेकिन एक ही कब्र

इस दर्दनाक घटना के बीच दोनों परिवारों ने ऐसा निर्णय लिया, जिसने गांव में सामाजिक एकता की मिसाल कायम कर दी। अलग-अलग जातीय पृष्ठभूमि से होने के बावजूद परिजनों की सहमति से दोनों सहेलियों को एक ही कब्र में दफनाया गया।

यह दृश्य गांव के लोगों के लिए बेहद भावुक कर देने वाला था। जिन दो बच्चियों ने जिंदगी में एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा, उनके परिवारों ने भी अंतिम विदाई में उनकी दोस्ती को अलग नहीं होने दिया। 13 वर्षों की दोस्ती की यह आखिरी कड़ी अब नवाबचक की सामूहिक स्मृति का हिस्सा बन गई है।

सहायता की राह देख रहे स्वजन

हादसे के तीन दिन बीत जाने के बाद भी दोनों पीड़ित परिवार सरकारी सहायता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे दुख की घड़ी में प्रशासनिक स्तर पर पीड़ित परिवारों तक सहायता पहुंचनी चाहिए। ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से भी अब तक अपेक्षित पहल नहीं हुई है।

सुहानी और सुप्रिया अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी दोस्ती की कहानी गांव में लंबे समय तक सुनाई जाती रहेगी। दोनों ने 13 साल साथ बिताए और अंतिम सफर भी साथ तय किया।

शायद यही वजह है कि नवाबचक के लोगों के लिए यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि दोस्ती की ऐसी दर्दनाक कहानी है, जिसने पूरे गांव को भीतर तक झकझोर दिया है।

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