गया में कैसी जिंदगी: बच्चों को गहरे पइन में उतरकर जाना पड़ता है स्कूल, प्रसव पीड़िता को खटिया पर ले जाते हैं ग्रामीण
मानपुर के गोपाल नगर में 800 से अधिक ग्रामीण सड़क और पुलिया के अभाव में नारकीय जीवन जी रहे हैं, ...और पढ़ें

पुलिया बने तो बदलेगी बच्चों और मरीजों की जिंदगी
HighLights
गोपाल नगर में 800 से अधिक लोग सड़क-पुलिया से वंचित।
बारिश में बच्चों को गहरे पानी से होकर स्कूल जाना पड़ता है।
प्रसव पीड़िता और मरीजों को खटिया पर अस्पताल ले जाना पड़ता है।
संवाद सूत्र, मानपुर(गया)। गया के मानपुर प्रखंड स्थित गोपाल नगर के करीब 90 घरों में रहने वाले 800 से अधिक लोगों की जिंदगी आज भी सड़क और पुलिया के इंतजार में है। गांव से स्कूल जाने के रास्ते में पइन-नाला पड़ता है। बारिश में इसमें गहरा पानी भर जाता है। इसके बावजूद बच्चे रोज इसी रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर हैं।
मां-बेटियों की पीड़ा देख कांप उठता है मन
सबसे ज्यादा पीड़ा तब होती है, जब गांव की किसी महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है। सड़क और पुलिया नहीं होने के कारण कई बार प्रसव पीड़िता को खटिया पर लिटाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को भी इसी परेशानी से गुजरना पड़ता है।
वर्षों से फरियाद, फिर भी नहीं बनी पुलिया
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुलिया के लिए कई बार मंत्री, विधायक और जिला प्रशासन से गुहार लगाई गई। सामाजिक कार्यकर्ता बंगाली मांझी और सुरेंद्र मांझी के अनुसार आजादी के बाद से गांव की यह समस्या दूर नहीं हुई। बरसात आते ही लोगों की मुश्किल और बढ़ जाती है।
800 लोगों के लिए नल-जल भी बेकार
गांव में नल-जल योजना के तहत पीएचईडी लगाया गया है, लेकिन यह कई महीनों से खराब पड़ा है। ग्रामीणों के अनुसार शॉर्ट सर्किट से उपकरण जलने के बाद इसकी मरम्मत नहीं हुई। सड़क के साथ पेयजल की समस्या ने भी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है।
पुलिया बने तो बदलेगी बच्चों और मरीजों की जिंदगी
ग्रामीणों ने सड़क निर्माण, पइन पर पुलिया और बंद नल-जल योजना को जल्द चालू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुलिया बनने से बच्चों को स्कूल जाने के लिए गहरे पानी में उतरने की मजबूरी खत्म होगी। वहीं प्रसव पीड़ित महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी आसान हो जाएगा।
