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जिस उम्र में पिता का हाथ थामना था, उसी उम्र में किया पिंडदान; गयाजी में भावुक कर गया 10 साल का ऋषि

Published: Wed, 30 Sep 2026 10:32 AM (IST)

बोधगया के धर्मारण्य वेदी पर पितृपक्ष के दौरान 10 वर्षीय ऋषि राज ने अपने दिवंगत पिता चेतलाल नोनिया के लिए ...और पढ़ें

पिता की तस्‍वीर रख प‍िंडदान करता ऋष‍ि राज। जागरण

पिता की तस्‍वीर रख प‍िंडदान करता ऋष‍ि राज। जागरण

संवाद सूत्र, बोधगया। पिता को खोने का दर्द शायद किसी उम्र का मोहताज नहीं होता। बोधगया के धर्मारण्य वेदी पर मंगलवार को पितृपक्ष की तृतीया तिथि के अवसर पर ऐसा ही एक मार्मिक दृश्य देखने को मिला।

महज 10 वर्ष के ऋषि राज ने अपने दिवंगत पिता चेतलाल नोनिया की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। कर्मकांड के दौरान पिता की तस्वीर सामने आते ही बच्चे की आंखों से आंसू छलक पड़े।

धनबाद निवासी ऋषि राज अपनी मां, चाचा और अन्य स्वजनों के साथ पितृपक्ष में पिंडदान के लिए बोधगया पहुंचे थे। धर्मारण्य वेदी पर पंडितों के मंत्रोच्चार के बीच जब पिता की तस्वीर उसके सामने रखी गई तो वह कुछ देर तक उसे निहारता रहा। इसके बाद विधि-विधान से पिंड अर्पित किया।

पिता की तस्वीर देखते ही छलक पड़े आंसू

कर्मकांड के दौरान ऋषि राज कई बार पिता की तस्वीर की ओर देखता रहा। उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। पास बैठी मां भी बेटे को देख भावुक हो उठीं। परिवार के अन्य सदस्य भी इस दौरान शांत रहे।

पिंडदान की प्रक्रिया पूरी करते हुए ऋषि ने पिता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उम्र छोटी होने के बावजूद वह पूरे कर्मकांड में परिजनों के साथ मौजूद रहा।

धर्मारण्य वेदी पर दिखा पिता-पुत्र के रिश्ते का भावुक पक्ष

धर्मारण्य वेदी पर पिंडदान के लिए पहुंचे अन्य श्रद्धालुओं की नजर भी इस दृश्य पर ठहर गई। पिता की तस्वीर के सामने बैठा बच्चा और उसके साथ बैठी मां का भावुक चेहरा वहां मौजूद लोगों को भी संवेदनशील कर गया।

पितृपक्ष में लोग अपने दिवंगत स्वजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करते हैं। इसी धार्मिक अनुष्ठान के बीच ऋषि राज ने अपने पिता के लिए पिंडदान किया। उसके लिए यह कर्मकांड केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पिता की स्मृति से जुड़ा भावुक क्षण भी रहा।

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