रक्सौल रेलवे स्टेशन पर पानी के लिए हाहाकार, A-ग्रेड स्टेशन पर एक-एक बूंद पानी को तरस रहे यात्री
रक्सौल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को पीने के पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि यह एक 'ए' ग्रेड स्टेशन है।

रक्सौल रेलवे स्टेशन पर पानी के लिए हाहाकार
HighLights
रक्सौल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को पीने के पानी की कमी।
'ए' ग्रेड स्टेशन होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव।
आईओडब्ल्यू ने जल्द पानी की व्यवस्था का आश्वासन दिया है।
संवाद सहयोगी, रक्सौल। रेल यात्रियों को सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर रेलवे कटिबद्ध है। हालांकि कुछ स्टेशनों पर स्थानीय अधिकारियों द्वारा इसकी अनदेखी की जाती है, जो इनकी कार्य के प्रति निष्क्रियता व उदासीनता को बयां करती है और इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है।
कुछ इसी तरह का नजारा रक्सौल स्टेशन पर देखने को मिल रहा है। अन्य सुविधाओं की बात तो दूर, यहां यात्री एक-एक बूंद पानी के लिए तरसते हैं। ए ग्रेड दर्जा प्राप्त रेलवे स्टेशन रक्सौल पर पीने का पानी की सुविधा नहीं है।
शौचालय व पीने का पानी की व्यवस्था नहीं
यात्रियों को प्यास बुझाने के लिए बंद पानी की बोतलों का सहारा लेना होता है। स्टेशन के पुननिर्माण कार्य को लेकर सभी कार्यालय दूसरे भवन में शिफ्ट है। जहां अधिकारियों के लिए शौचालय व पीने का पानी की व्यवस्था है, लेकिन यात्रियों का ध्यान नहीं रखा गया है।
प्लेटफार्म पर पीने की पानी का व्यवस्था है, लेकिन यहां प्यास बुझाने के लिए जाने पर टीटीई बाबू के कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है। जानकारी के अनुसार इस स्टेशन से प्रतिदिन लगभग दो हजार लोग अन्यत्र आते-जाते हैं। बेहतर राजस्व भी प्राप्त होता है।
बावजूद यात्री एक-एक बूंद पानी के लिए तरसते हैं। इसको लेकर रेल प्रशासन के विरुद्ध लोगों में आक्रोश व्याप्त है। इस संबंध में आईओडब्ल्यू श्रवण कुमार ने बताया कि पीने का पानी की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए चबूतरे का निर्माण कार्य चल रहा है। जल्द ही यहां यात्रियों के लिए पीने का पानी की व्यवस्था हो जाएगी।
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संवाद सहयोगी, रक्सौल। रेल यात्रियों को सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर रेलवे कटिबद्ध है। हालांकि कुछ स्टेशनों पर स्थानीय अधिकारियों द्वारा इसकी अनदेखी की जाती है, जो इनकी कार्य के प्रति निष्क्रियता व उदासीनता को बयां करती है और इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ता है।
कुछ इसी तरह का नजारा रक्सौल स्टेशन पर देखने को मिल रहा है। अन्य सुविधाओं की बात तो दूर, यहां यात्री एक-एक बूंद पानी के लिए तरसते हैं। ए ग्रेड दर्जा प्राप्त रेलवे स्टेशन रक्सौल पर पीने का पानी की सुविधा नहीं है।
शौचालय व पीने का पानी की व्यवस्था नहीं
यात्रियों को प्यास बुझाने के लिए बंद पानी की बोतलों का सहारा लेना होता है। स्टेशन के पुननिर्माण कार्य को लेकर सभी कार्यालय दूसरे भवन में शिफ्ट है। जहां अधिकारियों के लिए शौचालय व पीने का पानी की व्यवस्था है, लेकिन यात्रियों का ध्यान नहीं रखा गया है।
प्लेटफार्म पर पीने की पानी का व्यवस्था है, लेकिन यहां प्यास बुझाने के लिए जाने पर टीटीई बाबू के कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है। जानकारी के अनुसार इस स्टेशन से प्रतिदिन लगभग दो हजार लोग अन्यत्र आते-जाते हैं। बेहतर राजस्व भी प्राप्त होता है।
बावजूद यात्री एक-एक बूंद पानी के लिए तरसते हैं। इसको लेकर रेल प्रशासन के विरुद्ध लोगों में आक्रोश व्याप्त है। इस संबंध में आईओडब्ल्यू श्रवण कुमार ने बताया कि पीने का पानी की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए चबूतरे का निर्माण कार्य चल रहा है। जल्द ही यहां यात्रियों के लिए पीने का पानी की व्यवस्था हो जाएगी।
