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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 24, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

महंगाई की मार से मंदा पड़ा होटल व्यवसाय

By JagranEdited By:
Published: Sun, 24 Apr 2022 12:15 AM (IST)

मोतिहारी। कोरोना महामारी का सबसे ज्यादा असर सर्विस व शिक्षा के क्षेत्र में देखा गया है। इन दोन

महंगाई की मार से मंदा पड़ा होटल व्यवसाय
महंगाई की मार से मंदा पड़ा होटल व्यवसाय

मोतिहारी। कोरोना महामारी का सबसे ज्यादा असर सर्विस व शिक्षा के क्षेत्र में देखा गया है। इन दोनों ही सेक्टर को महामारी के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ा है। खासकर पिछले दो सालों में होटल व्यवसायियों ने खासा नुकसान उठाया है। अब जब चीजे सामान्य हो रही हैं तो खाने-पीने के सामानों के दाम में आसमान पर है। इससे होटल व्यवसायी आजिज हो चले हैं। बढ़ती महंगाई का असर रेस्टोरेंट पर भी देखा जा रहा है। महंगाई के कारण अमूमन लोग अब बाहर खाने से परहेज करने लगे हैं। वहीं जिले के छोटे-छोटे उद्योग धंधों पर भी महंगाई की मार पड़ी है। बिक्री कम होने से बाजार में मांग भी कम देखी जा रही है। अंगद सिंह, होटल व्यवसायी : पहले कोरोना और अब महंगाई ने होटल व्यवसाय पर बुरा असर डाला है। पहले की अपेक्षा अब होटल व्यवसाय में मेंटेनेंस का खर्च काफी ज्यादा बढ़ गया है। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए मास्क, सैनिटाइजर आदि वस्तुओं पर भी अलग से खर्च करना पड़ता है, जबकि पहले की अपेक्षा ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है। लव सिंह, होटल व्यवसायी : दाल, सब्जी, मिर्च मसालों के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है। होटल-रेस्टारेंटों में खाना अब तक पुराने दामों में ही बिक रहा है, लेकिन अब बढ़ती महंगाई का असर होटल-ढाबों पर दिखने लगा है। ग्राहकों की आवक कम होने से होटल व कर्मचारियों का खर्च निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। अब ऐसे में खाने के रेट बढ़ाने के अलावा और कोई उपाय नहीं है। कुमार विजय, होटल व्यवसायी : लगातार बढ़ती महंगाई के कारण होटल-रेस्टारेंट में खाना खाने वाले लोगों की संख्या पहले ही कम हो गई है। अब खाद्य सामग्रियों के दामों में वृद्धि होने के कारण होटल का संचालन करने में भी परेशानी आ रही है। सामग्रियों के दाम के अनुसार ही खाने के दाम भी तय करने के लिए चर्चा करेंगे। डॉ. शमिमुल हक : महंगाई की मार से सभी वर्ग के लोग त्रस्त हैं। शिक्षा, खाना व मकान बनाना लगातार महंगा होता जा रहा है। बाजारों में मांग कम होने से छोटे-छोटे उद्योग धंधों का संचालन करने वालो की भी मुसीबत बढ़ गई है। निजी विद्यालय में बच्चों को पढ़ाना मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।