मोतिहारी। शहर के छात्रों की आवाज बुलंद करनेवाले चंपारण छात्र संघ के सक्रिय सदस्य आशुतोष कुमार उर्फ आशुतोष भारद्वाज पिछले दो साल से लगातार व्हील चेयर के सहारे चल रहे हैं। 26 जून 2916 को शहर के नेहरू स्टेडियम में दौड़ने के दौरान अचानक से गिरने के बाद हुई स्पाइनल इंज्यूरी ने उनके जीवन से समाजसेवा के रंग को छीन लिया है। स्पाइनल इंज्यूरी होने के बाद से वे अपने पैरों पर खड़े होने की खातिर देश के विभिन्न अस्पतालों का चक्कर लगा चुके हैं। इस दौरान उन्होंने राजधानी पटना, लखनऊ और दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में अपना इलाज कराया। इस दौरान गर्दन से नीचे के कुछ हिस्सों में ताकत आई। लेकिन, कमर के नीचे के हिस्से को ताकत नहीं मिली। इस दौरान करीब 6 लाख रुपये भी खर्च हो गए। इन सबके बीच समाजसेवा करने की चाह रखनेवाले आशुतोष को साथ मिला है पूर्वी चंपारण के सरोतर निवासी युवा उद्योगपति राकेश पांडेय का। राकेश को स्थानीय छात्रों ने जब आशुतोष की हालत से अवगत कराया तो उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि वे इस छात्र का इलाज कराने में सहयोग करेंगे। सोमवार को राकेश ने आशुतोष को फेसबुक मैसेंजर पर संदेश दिया कि वे अपने पहचान से संबंधित दस्तावेज भेज दें, उन्हें 28 जनवरी को राजधानी पटना से हवाई मार्ग से दिल्ली ले जाया जाएगा। आशुतोष ने बताया कि अस्पताल का चक्कर लगाते-लगाते तबाह हो चुके हैं। आर्थिक तौर पर भी बहुत बुरी तरह से परेशान हुए हैं। इस बीच श्री पांडेय द्वारा स्थापित ब्रावो फाउंडेशन की टीम ने मेरी हालत देखी। उनको सूचना दी। अब उन्होंने मुझे दिल्ली ले जाने का फैसला किया है। वे लगातार समाज के लोगों की मदद कर रहे हैं। उम्मीद है कि इस बार मैं स्वस्थ हो जाऊंगा। पिता करते हैं निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य बता दें कि आशुतोष के परिवार में उनके पिता निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य करते हैं। मां गृहिणी हैं। दो भाईयों में बड़े आशुतोष शहर के कॉलेज में स्नातक द्वितीय ?वर्ष के छात्र थे तभी यह हादसा हो गया। वे उस वक्त सेना (सीआरपीएफ) की नौकरी के लिए प्रयास कर रहे थे। उसमें सफल भी हुए। लेकिन, एक हादसे ने उन्हें तोड़ दिया। छात्र व युवाओं का ध्यान रखना सबका धर्म इस बारे में ब्रावो फार्मा के सीएमडी राकेश पांडेय बताते हैं कि छात्र के बीमार होने की जानकारी मिली थी। उन्हें जांच के लिए दिल्ली बुलाया जा रहा है। जांच के बाद इलाज के आगे की व्यवस्था होगी। इस तरह के काम सभी सफल लोगों को करना चाहिए।

Posted By: Jagran

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