मोतिहारी । देश में बढ़ती बेरोजगारी, खराब होती अर्थव्यवस्था व कृषि संकट की समस्याओं के लिए शुक्रवार को जिला कांग्रेस ने केंद्र सरकार से इस्तीफा मांगा है। इन मुद्दों को लेकर शहर के कचहरी चौक पर आयोजित धरना सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार शुक्ल ने सीधे तौर पर पीएम मोदी से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि लाख कोशिशों के बाद भी केंद्र की एनडीए सरकार बढ़ती बेरोजगारी व गिरती अर्थव्यवस्था को संभाल नहीं पा रही है। ऐसे में इस सरकार को अब सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ भावनाओं को भड़का कर सता से चिपके रहना चाहती है, जिसे कांग्रेस कभी सफल नहीं होने देगी। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी व प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त निर्देश पर आयोजित धरना को संबोधित करते हुए पर्यवेक्षक डॉ. प्रयाग प्रसाद सिंह कुशवाहा ने कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण देश में दिन व दिन बेरोजगारी व कृषि संकट बढ़ता जा रहा है। पर्यवेक्षक डा. कुशवाहा व जिलाध्यक्ष श्री शुक्ल ने इस मौके पर स्थानीय समस्याओं को भी एक-एक कर गिनाया और इसके निपटारे की समुचित व्यवस्था की मांग की। नेताओं ने इसके साथ ही पटना में आगामी 24 नवंबर को आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। धरना को संबोधित करने वालों में प्रो. विजय शंकर पांडेय, अरूण यादव, रवींद्र प्रताप सिंह, बिट्टू यादव, सुजीत तिवारी, बच्ची पांडेय, कमलेश्वर गुप्ता, सर्फुद्दीन विस्मिल, रमेश सहनी, अफरोज आलम, सत्येंद्रनाथ तिवारी, अरूण प्रकाश पांडेय, अनवर आलम अंसारी, शशिकांत मिश्र, विनय कुमार उपाध्याय, विनय कुमार सिंह, अमर कुशवाहा, मोद नारायण कुंवर, संजय पांडेय, रमेश श्रीवास्तव, डॉ. जियाउल हक, सौरभ कुमार, औसेदूर्रहमान, प्रीतम अग्रवाल, नयाज खां, राजकुमार अंजुमन, भूपनारायण पांडेय, अजीत कुमार, अखिलेश दयाल, बासुदेव राम, सुजीत कुमारी तिवारी, कौशर अंसारी, जवाहर लाल सिंह कुशवाहा, पतिराम यादव, ललन सिंह, मो. जफरूल्लाह, दिनेश सिंह, श्रीनारायण सिंह, विक्रमा प्रसाद, मो.इम्तेयाज अख्तर आदि शामिल थे।

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कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन

धरना-सभा के उपरांत जिला कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी रमण कुमार से मिला। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम पांच सूत्री मांगों का ज्ञापन को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण देश में तेजी से बेरोजगारी और नाउम्मीदी बढ़ती जा रही है। वहीं अर्थव्यवस्था भी पूरी तरह चौपट हो गई और यह शर्मनाक स्थिति में पहुंचने की ओर अग्रसर है। किसानों को दुर्दशा झेलनी पड़ रही है। अधिकांश सरकारी उपक्रम घाटे में चल हैं और कई संस्थानों को निजी हाथों में तेजी से सौंपे जा रहे हैं। इसलिए अब इन मामलों में राष्ट्रपति का हस्तक्षेप जरूरी है।

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Posted By: Jagran

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