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Bihar News: एक दीपक मिटा सकता है अकाल मृत्यु का भय, धनतेरस पर क्यों है इसका खास महत्व?

Published: Thu, 05 Nov 2026 02:29 PM (IST)

Dhanteras Shubh Muhurat : धनतेरस पर घर के मुख्य दरवाजे पर घी का दीपक जलाने की पौराणिक परंपरा है, जिससे ...और पढ़ें

सुशील कुमार पाण्डेय।

सुशील कुमार पाण्डेय।

HighLights

  1. धनतेरस पर मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं।

  2. यह दीपक अकाल मृत्यु का भय दूर करता है।

  3. यमदेव को प्रसन्न करने हेतु दीपदान की परंपरा।

संवाद सहयोगी, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। Dhanvantari Jayanti : धनतेरस पर सोना-चांदी और बर्तन खरीदने की परंपरा तो लगभग हर घर में निभाई जाती है, लेकिन इस पर्व पर जलाया जाने वाला एक दीपक भी बेहद खास महत्व रखता है।

पौराणिक मान्यता है कि धनतेरस की शाम घर के मुख्य दरवाजे पर घी का दीपक जलाने से अकाल मृत्यु या दुर्मरण का भय नहीं रहता।

इसे यमदेव को प्रसन्न करने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ी परंपरा माना जाता है। इस बार प्रदोष व्रत एवं धन्वंतरि जयंती के संयोग में धनत्रयोदशी का पर्व 6 नवंबर शुक्रवार को मनाया जाएगा।

यमदेव के नाम दीपदान की परंपरा

स्थानीय आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान-वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार, धनतेरस के प्रदोषकाल (सायंकाल) में घर के दरवाजे पर घी का दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता। इस दिन दीपदान करने से मृत्यु, पाश, दंड, काल और लक्ष्मी के साथ सूर्यनंदन यम प्रसन्न होते हैं।

समुद्र मंथन से जुड़ा है धनतेरस का महत्व

कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी को धनत्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती मनाने का विधान है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कलश के साथ भगवती लक्ष्मी का अवतरण हुआ था।

इसी के प्रतीक स्वरूप इस दिन ऐश्वर्य वृद्धि की कामना से नई वस्तुएं, विशेषकर बर्तन, सोना-चांदी आदि खरीदकर घर लाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन धन का अपव्यय नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से अगले वर्ष धन का संचय होता है।

आरोग्य के देवता हैं भगवान धन्वंतरि

भागवत महापुराण के अनुसार, भगवान विष्णु के अंशावतार कालांतर में धन्वंतरि के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्हें आयुर्वेद का प्रवर्तक माना जाता है।

उनका आविर्भाव कार्तिक कृष्णपक्ष त्रयोदशी को हुआ था। इसी कारण प्रतिवर्ष इस तिथि को आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की जयंती धूमधाम से मनाई जाती है।

धनतेरस पर खरीदारी और लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त

  • कुंभ लग्न: दोपहर 1:07 से 2:39 बजे तक।
  • वृष लग्न: शाम 5:45 से रात 7:42 बजे तक।
  • निशीथकाल (सिंह लग्न): रात 12:13 से 2:27 बजे तक।

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