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पूर्वी चंपारण : बारिश ने बिगाड़ा आलू की खेती का गणित, कृषि विशेषज्ञ ने बताया बचाव का तरीका

Published: Thu, 08 Oct 2026 05:23 PM (GMT+05:30)

पूर्वी चंपारण में बारिश ने आलू की खेती की तैयारी में बाधा डाली है, जिससे किसानों को बुवाई में देरी ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. बारिश के कारण पूर्वी चंपारण में आलू की बुवाई में देरी।

  2. किसानों को दिसंबर-जनवरी में झुलसा रोग का डर सता रहा है।

  3. कृषि विशेषज्ञ ने मध्यम प्रजाति के आलू बोने की सलाह दी।

जागरण संवाददाता, रक्सौल (पूर्वी चंपारण)। अनुमंडल क्षेत्र के हरपुर, चिकनी, माघी बरवा, कटकेनवा भवानीपुर, रघौता, रघुनाथपुर सहित कई गांवों में किसान सब्जी की खेती करते है। जिसकी तैयारी धान की रोपनी के समय ही किसान कर लेते है।

भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में किसान अधिकांशत: अगहनी धान की फसल लगाते है। लेकिन, वैसे किसान जो सब्जी उत्पादित करते है वे अर्ली वेराईटी के धान की रोपाई करते है। जो कम समय में तैयार हो जाता है।

जिसकी कटाई अब समाप्ति के कगार पर है। किसान सब्जी उत्पादन के लिए खेत की मिट्टी को सब्जी फसलों के लिए तैयार करने के इंतजार में है। इस बीच सीमावर्ती क्षेत्रों में रुक-रुककर हो रही बारिश से खेतों में पानी जमा हो गया है।

जो किसानों की बेचैनी को बढ़ा रहा है। किसान शिवलाल ठाकुर, रामबाबू ठाकुर, नवल यादव, रुपेश कुमार आदि ने बताया कि धान की कटनी हो चुकी है। अब जोताई शुरु होनेवाला था।

इस बीच बुधवार को दिन में हुई बारिश से खेतों में पानी भर गया है। जिसे जोताई का कार्य फिलहाल करीब दस दिन तक बाधित हो गया है। खेतों में नमी अधिक होने के कारण अब जोताई का कार्य करीब दस दिन विलंब हो गया है।

किसानों का कहना था कि धान की कटनी के बाद सीमावर्ती क्षेत्र के कुछेक गांवों के किसान आलू की खेती मुख्य रुप करते है। किसानों के बेचैनी का मुख्य कारण है दिसंबर व जनवरी माह में सीमावर्ती क्षेत्रों में ठंड के कारण आलू में झुलसा रोग की संभावना बढ़ जाती है।

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जिसे लागत के अनुरुप पैदावार नहीं होता है। जिसे किसान बेचैन हो रहे है। वहीं, तेज हवा के साथ हुई बारिश से अगहनी धान की तैयार फसल को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।

मौसम के लगातार बदलते रुख से किसान मायूस और हतोत्साहित हैं। किसानों को अब मौसम साफ होने का इंतजार है, ताकि खेतों की तैयारी पूरी कर समय पर सब्जी की खेती शुरू की जा सके।

इस संबंध में कृषि तकनीकी प्रबंधक दिनेश दूबे ने बताया कि आलू के अगेती बोआई का समय 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक सबसे अच्छा माना जाता है।

मौसम खराब होने से आलू की खेती खराब हो सकती है। इसे बचने के लिए किसान मध्यम प्रजाति के आलू की बोआई किसानों के लिए लाभदायक होगी।