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मोतिहारी के सरकारी अस्पताल में आधा दर्जन सिविल सर्जन बदले, फिर भी नेत्र रोग विभाग की व्यवस्था चौंकाने वाली

Published: Wed, 14 Oct 2026 05:08 PM (IST)

मोतिहारी सदर अस्पताल का आंख विभाग छह साल से बदहाल है, जहां मोतियाबिंद समेत अन्य ऑपरेशन शुरू नहीं हो पाए ...और पढ़ें

पूर्वी चंपारण का मोतिहारी सदर अस्पताल। जागरण

पूर्वी चंपारण का मोतिहारी सदर अस्पताल। जागरण

HighLights

  1. मोतिहारी सदर अस्पताल में आंख विभाग छह साल से बदहाल।

  2. आधुनिक उपकरण खरीदे गए पर ऑपरेशन शुरू नहीं हो सके।

  3. मरीजों को इलाज के लिए निजी क्लीनिकों पर निर्भर रहना पड़ रहा।

संवाद सहयोगी, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण)। सदर अस्पताल के आंख विभाग की बदहाली दूर होने का नाम नहीं ले रही है। छह साल पहले आंख अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस कर मोतियाबिंद समेत अन्य आपरेशन शुरू कराने की योजना बनी थी।

तब उपकरणों की खरीद भी हुई, लेकिन आज तक आपरेशन की सुविधा बहाल नहीं हो सकी। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव की आपत्ति और निर्देश के बावजूद व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

इस दौरान करीब आधा दर्जन सिविल सर्जन बदल गए, लेकिन आंखों के मरीजों की परेशानी जस की तस बनी हुई है। इस बीच विभाग को पुराने स्थान से शिफ्ट जरूर कर दिया गया है। हालांकि अब इसकी व्यवस्था नए बने ओपीडी भवन के प्रथम तल पर स्थित एक कमरे तक सिमट कर रह गई है।

छह साल पहले खरीदे गए उपकरण का हिसाब नहीं

बताते हैं कि वर्ष 2019 में आंख विभाग को अपग्रेड करने के उद्देश्य से पांच लाख रुपये से अधिक के उपकरण खरीदे गए थे। मकसद था कि सदर अस्पताल में ही आधुनिक सुविधाओं के साथ मोतियाबिंद और आंखों के अन्य ऑपरेशन किए जा सकें।

लेकिन उपकरणों की खरीद के बावजूद योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। उस समय खरीदारी में अनियमितता के आरोप भी सामने आए थे।

जानकारों के अनुसार, खरीदे गए उपकरण लंबे समय तक एनसीडी सेल में पड़े रहे और उन्हें आंख विभाग को उपलब्ध नहीं कराया गया। बाद में तत्कालीन सिविल सर्जन डा. अंजनी कुमार ने उपकरणों के संबंध में जानकारी लेने के लिए संबंधित अधिकारियों को कई बार पत्र भी लिखा था।

हालांकि, उपकरणों की वास्तविक स्थिति और उनके इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी। सवाल यह है कि मरीजों की सुविधा के लिए खरीदे गए उपकरण आखिर कहां हैं और उनका उपयोग क्यों नहीं हो रहा है।

प्रधान सचिव की आपत्ति भी बेअसर

सदर अस्पताल में आंखों के आपरेशन की सुविधा नहीं होने की जानकारी मिलने पर स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद आंख विभाग को अपग्रेड करने की कवायद शुरू हुई।

उद्देश्य था कि आंखों के ऑपरेशन के लिए पर्याप्त जगह और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। शिफ्ट करने की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद आंख विभाग को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल सकीं। पुराने स्थान से हटाकर विभाग को नए ओपीडी भवन के प्रथम तल पर एक कमरे में संचालित किया जाने लगा।

आपरेशन नहीं होने से मरीजों की जेब पर पड़ रहा बोझ

मोतियाबिंद समेत आंखों की अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को आपरेशन के लिए निजी क्लीनिकों, दूसरे जिलों और नेपाल तक जाना पड़ता है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के साथ आने-जाने पर भी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है।

सदर अस्पताल में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने पर पात्र मरीजों को सरकारी प्रावधानों के अनुसार कम खर्च या निशुल्क उपचार का लाभ मिल सकता है।

खरीदे गए उपकरणों के बाबत जानकारी तलब की गई है। अस्पताल के आंख विभाग की व्यवस्था जल्द ही दुरुस्त की जाएगी।
- डा दिलीप कुमार सिंह, सिविल सर्जन

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