मोतिहारी। भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित ए ग्रेड दर्जा प्राप्त रक्सौल रेलवे स्टेशन पर इन दिनों बेसहारा पशु चारा खोजने पहुंच जाते है। ये पशु प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों की भीड़ को चीरकर चारा खोजते रहते हैं। स्टेशन पर इनसे इनके विचरण से यात्रियों के बीच अफरातफरी मच जाती है। कई यात्री घायल भी हो जाते हैं। बावजूद रेलवे प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटती है। ऐसे पशुओं के स्वच्छंद विचरण पर रोक लगाने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। हां कभी-कभार लोगों के आक्रोश के मद्देनजर ऐसे पशुओं को भगाकर अपने ड्यूटी की खानापूर्ति कर ली जाती है। वहीं अधिकारियों की माने तो पूर्व में स्टेशन की साफ-सफाई का जिम्मा लिए एजेंसियों के कर्मियों द्वारा आवारा पशुओं को भगाने का कार्य किया जाता है। लेकिन इन दिनों साफ-सफाई का टेंडर समाप्त हो गया है। जिसके कारण रेलवे अपने स्तर से साफ-सफाई का कार्य कर रही है। रक्सौल रेलवे जंक्शन पर प्रतिदिन लगभग पांच हजार यात्री आते-जाते है। इनमें देसी-विदेशी पर्यटकों की संख्या खासी रहती है। यह पशु भोजन की तलाश में प्लेटफॉर्म पर रखे गए डस्टबिन को तितर-बितर कर देते हैं। बात यही खत्म नही होती। नाश्ता कर रहे यात्रियों पर टूट पड़ते है। इनके मल मूत्र पर यात्री फिसल कर चोटिल हो जाते हैं। इस दौरान लोगों में रेलवे प्रशासन के विरुद्ध आक्रोश देखा जाता है। इस संबंध में स्टेशन प्रबंधक अनिल कुमार सिंह ने बताया कि स्टेशन का परिक्षेत्र खुला रहने के कारण कभी-कभी आवारा पशु प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाते है। रेल कर्मियों द्वारा ऐसे पशुओं को भगाने का कार्य किया जाता है।

Posted By: Jagran

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