मोतिहारी। केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा है कि देश के किसानों को समृद्ध बनाने की दिशा में केंद्र की सरकार लगातार काम कर रही है। इस कड़ी में पूर्वी चंपारण में हुए कार्य धरातल पर हैं। भारत सरकार द्वारा देश भर के जल जमाव वाले क्षेत्रों की उत्पादकता बढ़ाने एवं भूमि सुधार के लिए महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान की स्वीकृति 13 अगस्त 2015 को प्रदान की गई थी। इस संस्थान का शिलान्यास 21 अगस्त 2015 को किया गया था। आज यह बनकर तैयार है। यह संस्थान जल जमाव वाले क्षेत्रों के लिए समेकित कृषि प्रणाली के विकास के अलावा मानव कौशल व‌र्द्धन एवं किसान प्रक्षेत्र में कृषि मॉडल के विकास का भी कार्य करेगा। इसके प्रशासनिक सह-प्रयोगशाला भवन एवं मुख्य प्रवेश द्वार का विधिवत उद्घाटन हो गया है। संस्थान के लिए वैज्ञानिक एवं अन्य संवर्ग के कुल 30 पदों की भी स्वीकृति प्रदान की गई है। यह संस्थान शीघ्र ही सुचारू ढंग से काम करने लगेगा। कृषि के क्षेत्र में महिलाओं का योगदान अहम मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को याद करते हुए कहा कि महिलाएं राष्ट्र के विकास में पुरुषों के बराबर ही महत्व रखती हैं। राष्ट्र के विकास के लिए कृषि कार्यो से जुड़ी महिलाओं के सशक्तिकरण पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। खास कर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं घरेलू कार्य तथा बच्चों को संभालने के साथ साथ कृषि कार्य में भी हाथ बटाती हैं। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि कृषि में कार्यरत महिलाओं की स्थिति में तेजी से सुधार हो।इसके लिए देश भर के कृषि संस्थानों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के द्वारा कृषि कार्यो में लगी महिलाओं तक प्रशिक्षण के माध्यम से उन्नत कृषि एवं गृह विज्ञान के तकनीकों को पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि महिलाएं सशक्त और आत्म निर्भर हो सकें। बुनियादी विद्यालय की बच्चियों को किया सम्मानित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मंत्री ने बुनियादी विद्यालय की बच्चियों को सम्मानित किया। कहा कि मनुष्य के जीवन निर्माण में महिलाओं का योगदान सर्वोच्च है। केंद्र सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाओं को चलाया है। देश के हर इलाके के कृषि मॉडल को अब देख सकेंगे जिले के किसान मंत्री ने साफ किया कि महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान का निर्माण मात्र 42 महीनों में विभाग ने पूरा कर लिया। इसके बन जाने से जिले के किसान देश के कोने-कोने में हो रहे मॉडल कृषि को देख सकेंगे। संस्थान ने अपना कार्य आरंभ कर दिया है। बिहार के विकास में अग्रणी भूमिका निभानेवाले कर्पूरी ठाकुर व कैलाशपति मिश्र की प्रतिमा भी यहां लगाई जाएगी। इन विभूतियों ने कांग्रेस के भ्रष्टाचार से बिहार को मुक्ति दिलाने का गौरवशाली काम किया। विरोधियों पर बरसे, कहा- 55 साल में सत्ता में रहने पर भी किसानों की चिता नहीं की तत्कालीन सरकार ने मंत्री ने विरोधियों पर निशाने साधते हुए कहा कि आज वे पाकिस्तान का गुणगान कर रहे हैं। 55 साल सत्ता में रहने पर गरीबों व किसानों की चिता नहीं हुई। अब जब देश विकास की ओर अग्रसर है तो उनकी चिता बढ़ती जा रही है। पहली बार परिवारवाद से हटकर सत्ता एक गरीब के हाथों में आई। उस गरीब ने जो पांच सालों में कर दिया उसने 55 सालों में नहीं किया। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना, पशु प्रजनन केंद्र बना।

किसानों के हित में सरदार बल्लभ भाई पटेल सहकारी प्रशिक्षण केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय, बांस नर्सरी केंद्र, केला टिशू कल्चर लैब केंद्र निर्माण हुआ। ये सभी संस्थान कृषि क्षेत्र में उत्पादन व आय वृद्धि के संदर्भ में अहम भूमिका निभा रहे हैं। 700 जवानों को मछली पालन, बकरी पालन का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। कौशल विकास के माध्यम से 2017-18 और 2019 मे विभिन्न कंपनियों के द्वारा कैंपस सलेक्शन कर 5000 युवक एवं युवतियों को रोजगार दिया गया है। वहीं मदर डेयरी के माध्यम से 1200 दूध कलेक्शन सेन्टर ,100 चालक, एवं 4000 लोगो को मजदूर एवं पदाधिकारी के पद पर रोजगार दिया गया है।

Posted By: Jagran

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