दरभंगा । लनामिविवि के ¨हदी विभाग में बुधवार को ¨हदी आलोचना के शिखर पुरुष डॉ. नामवर ¨सह के निधन पर एक शोकसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ¨हदी विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रभानु प्रसाद ¨सह ने कहा कि डॉ. नामवर ¨सह ¨हदी आलोचना की परंपरा में पंडित रामचंद्र शुक्ल, पंडित हजारी प्रसाद द्विवेदी और डॉ. रामविलास शर्मा की पंक्ति में खड़े दिखते है। उन्होंने आलोचना में साहित्यिक-सौष्ठव का समावेश किया है। मेरा सौभाग्य है कि मैं उस महान गुरु का शिष्य हूं, जो जितने बड़े साहित्य मीमांसक थे, उतने ही बड़े अध्यापक भी थे। आलोचना में रचना का आस्वाद उत्पन्न करने वाले डॉ. नामवर ने बड़ी समर्थ और सक्षम पीढ़ी का निर्माण किया है। साहित्यिक गतिविधियों के केंद्र में रहने वाले इस आचार्य का लेखन पारसमणि के समान था। जिसको उन्होंने छू दिया, वही चमकता सितारा बन गया। ऐसे में उनका सरोकार वाद और संवाद ही नहीं, विवादों से भी गहराई तक जुड़ा रहा और इन सब के द्वारा उन्होंने ¨हदी की नवीन शक्तियों का उत्खनन किया। बीआरए बिहार विवि मुजफ्फरपुर के पूर्व ¨हदी विभागाध्यक्ष प्रमोद कुमार ¨सह ने नामवर ¨सह की साहित्यिक निष्ठा की सराहना की और कहा कि मा‌र्क्सवादी आलोचना के सशक्त हस्ताक्षर होने के अलावा वे एक ¨जदादिल कवि भी थे। उनकी कविता की संवेदना गहरी थी। जिसके बल पर उन्होंने नवीन साहित्यिक प्रवृत्तियों की मर्मी समालोचना की। डॉ. नामवर ¨सह में अपेक्षित और अनपेक्षित को परखने की अदभुत कला थी। पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष व ¨हदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामचंद्र ठाकुर, डॉ. विजय कुमार, डॉ. सुरेंद्र प्रसाद सुमन व डॉ. आनंद प्रकाश गुप्ता ने भी नामवर ¨सह के प्रति अपने-अपने उदगार व्यक्त किए। मौके पर विभाग के वरीय शोधप्रज्ञ उमेश कुमार शर्मा, शंकर कुमार, पार्वती कुमारी, खुशबू कुमारी, प्रिया कुमारी, ज्वालाचंद्र चौधरी समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे। इससे पूर्व नामवर ¨सह की तस्वीर पर पुष्पांजलि कर 1 मिनट का मौन रखा गया।

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Posted By: Jagran

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