दरभंगा। स्वतंत्रता सेनानी राम¨सहासन मंडल ने कहा है कि धानुक जाति मार्शल कौम रही है। जिनका इतिहास हमेशा से ही देश की सुरक्षा एवं आन बान शान को बनाए रखने के लिए मर मिटने का रहा है। वे बेनीपुर कर्पूरी सभा भवन में रविवार को अखिल भारतीय धानुक उत्थान महासंघ के तत्वावधान में आयोजित अमर शहीद रामफल मंडल कीं 75 वी वर्षगांठ सह प्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सरकार से रामफल मंडल को राष्ट्रीय एवं राजकीय सम्मान देने की मांग की। सम्मलेन की अध्यक्षता महासंघ के जिलाध्यक्ष गोपाल मंडल ने की। सम्मेलन में सबसे पहले संघ के सभी कार्यकर्ताओं ने शहीद रामफल मंडल के तैलचित्र पर माल्यार्पण किया। कृष्णचंद्र शास्त्री ने कहा कि एक साजिश के तहत शासक वर्गों ने धानुक समाज के लोगों को मूलभूत अधिकारों से दूर रखा है। बिहार छोडकर अन्य राज्यों में धानुक जाति अनुसुचित जनजाति में शामिल है। उन्होंने सरकार से धानुक जाति को अविलंब अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग की। विनोद बिहारी मंडल ने कहा कि जिस समाज के लोग अपने पूर्वजों को भूल जाते हैं उस समाज के लोगों का अस्तित्व ही मिट जाता है। बंगाल विभाजन के बाद आजादी की लड़ाई में फांसी को गले लगाने वाले बिहार के प्रथम रामफल मंडल ही हैं जिन्होंने 24 अगस्त 1942 ई में अंग्रेज सरकार के वरीय पुलिस पदाधिकारियों को मौत के घाट उतारकर आजादी का शंखनाद किया। हत्या के आरोप में 23 अगस्त 1943 को भागलपुर सेंट्रल जेल में फांसी दे दी गई। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से शहीद के नामपर डाक टिकट जारी करने, पटना के मुख्य मार्ग के समीप प्रतिमा लगाने की मांग की। जिलाध्यक्ष गोपाल मंडल ने धानुक समाज के लोगों को राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग की। सम्मेलन को रामदयाल मंडल, डॉ. कृष्णकांत मंडल, रामविनोद मंडल, हरि प्रसाद मंडल, उप प्रमुख विरजू मंडल, विन्देश्वर मंडल सहित धानुक समाज के दर्जनों लोगों ने संबोधित किया।

Posted By: Jagran