दरभंगा का 'घूटन' बना भारतीय सिनेमा का दिग्गज अदाकार, फिल्म भक्षक के लिए संजय मिश्रा को राष्ट्रीय पुरस्कार
Sanjay Mishra National Award: संजय मिश्रा, मूल रूप से दरभंगा के नारायणपुर गांव के निवासी, को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ...और पढ़ें

अभिनेता संजय मिश्रा की फाइल फोटो।
HighLights
संजय मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
यह सम्मान उन्हें फिल्म 'भक्षक' में उनके किरदार के लिए मिला।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एकता नगर में पुरस्कार प्रदान किया।
संत ज्ञानेश्वर, मनीगाछी (दरभंगा)। Sanjay Mishra National Award: यदि इंसान अपने भीतर छिपे हुनर को पहचान कर उसे तराशने की जिद पाल ले तो किसी छोटे से गांव की गलियों से निकलकर भी देश के सबसे बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है।
दरभंगा जिले के मनीगाछी प्रखंड स्थित नारायणपुर गांव के 'घूटन' ने इस बात को साबित कर दिखाया है।
राष्ट्रपति के हाथों सम्मान
हिंदी सिनेमा के सुप्रसिद्ध अभिनेता संजय मिश्रा, जिन्हें बचपन में प्यार से सब 'घूटन' कहते थे, उन्हें 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के सम्मान से आज नवाजा जाएगा।
गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा।

गांव में खुशी की लहर
यह ऐतिहासिक क्षण न केवल संजय मिश्रा की अभिनय यात्रा का स्वर्णिम पड़ाव है, बल्कि संपूर्ण मिथिलांचल के लिए गर्व का विषय है।
संजय मिश्रा का जन्म और जड़ें नारायणपुर गांव से जुड़ी हैं। उनके राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने की खबर मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्रों में जश्न का माहौल बन गया।
पत्रकारिता और कला का परिवेश
संजय मिश्रा का पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद समृद्ध रही है। उनके स्वजन राजीव मिश्रा के अनुसार उनके पिता स्व. शंभुनाथ मिश्रा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में कार्यरत थे और पत्रकारिता जगत से भी जुड़े रहे।
उनके दादा स्वर्गीय जगदीप नारायण मिश्रा संयुक्त बिहार-झारखंड के रांची प्रमंडल के आयुक्त रहे थे।
बनारस की गलियों का असर
संजय मिश्रा का बचपन पटना, बनारस और दिल्ली में गुजरा। उनकी शुरुआती शिक्षा पटना के सेंट जेवियर्स हाई स्कूल से हुई। बचपन में वे किताबों से ज्यादा आसपास के लोगों को देखने और उनकी नकल उतारने में मग्न रहते थे। पिता के तबादले के बाद उनका बचपन बनारस के घाटों और गलियों में बीता।
दादी का प्यार और अभिनय
बनारस में वे अपनी दादी के बेहद करीब रहे। बनारस के घाट, रामलीला और साधु-संतों के हाव-भाव को वे करीब से ऑब्जर्व करते थे। यही जमीनी अनुभव आगे चलकर उनके अभिनय की रीढ़ बना। पढ़ाई में मन न लगने पर पिता ने उनकी कलात्मक रुचि को पहचाना और आगे बढ़ने में मदद की।
एनएसडी से मिला असली निखार
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से अभिनय का औपचारिक प्रशिक्षण लेने के बाद संजय मिश्रा ने टेलीविजन और फिल्मों का रुख किया। धारावाहिक 'ऑफिस-ऑफिस' के 'शुक्लाजी' से लेकर 'आंखों देखी', 'मसान' और 'वध' जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने बहुआयामी अभिनय का लोहा मनवाया।
भक्षक में निर्भीक पत्रकार का किरदार
फिल्म 'भक्षक' में संजय मिश्रा ने 'भास्कर सिन्हा' नाम के एक संवेदनशील, साहसी और जमीनी पत्रकार की भूमिका निभाई। सामाजिक सरोकार और सच को सामने लाने की उनकी इस भूमिका को समीक्षकों ने खूब सराहा, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला।
अपनी जड़ों से गहरा लगाव
राष्ट्रीय ख्याति पाने के बाद भी संजय मिश्रा का अपनी मिट्टी और कुलदेवी से गहरा लगाव बना हुआ है। वे अक्सर समय निकालकर अपने पैतृक गांव नारायणपुर आते हैं।
ग्रामीण युवाओं के लिए उनकी यह सफलता एक प्रेरणापुंज की तरह है, जो साबित करती है कि प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती।
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