दरभंगा। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने कहा कि भू-गर्भ जलस्तर लगातार नीचे जाने के कारण पेयजल की कमी एक बड़ी संकट बनती जा रही है। इससे निपटने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने की जरूरत है। इसमें रेन वाटर हार्वेस्टिग यानि वर्षा के जल का किसी खास माध्यम से संचयन सबसे आसान विकल्प है। कहा कि रेन वाटर हार्वेस्टिग ज्यादा प्रचलन में नहीं होने के कारण वर्षा का पानी बह जाता है। इसका संचयन और इसको रिचार्ज किया जाना आवश्यक है। बताया कि पानी की समस्या के निदान को लेकर केंद्र सरकार ने जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है। मंत्रालय ने 1 जुलाई से संचय जल, बेहतर कल पर काम करना शुरू कर दिया है। कहा कि प्रथम चरण में सरकार द्वारा राज्य के मात्र 12 जिलों के 20 प्रखंडों का चयन किया गया है, जिसमें दरभंगा जिला का कोई प्रखंड शामिल नहीं है। इस अभियान में शामिल नहीं होने के बाद भी जलसंकट को देखते हुए वाटर हार्वेस्टिग एवं ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग को लेकर जिला में अभियान चलाया जाएगा। इसके पूर्व जिलाधिकारी ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला की रूपरेखा डीडीसी डॉ. कारी प्रसाद महतो ने प्रस्तुत की। मौके पर निदेशक डीआरडीए, डीपीआरओ, डीईओ, कार्यपालक अभियंता भवन व मनरेगा, डीएओ, डीएफओ, रोटरी क्लब, लाइंस क्लब आदि के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। सरकारी भवनों की छतों पर जमा पानी का होगा संचय :

डीएम ने कहा कि इस अभियान के तहत सबसे पहले सभी सरकारी भवनों के छत से वर्षा के पानी को पाइप के जरिए गढ्ढे में ले जाया जाएगा, जहां से यह पानी जमीन द्वारा अवशोषित कर लिया जाएगा। इस प्रक्रिया से भू-जल पुनर्भरण हो जाएगा और भू-जल का समान स्तर बना रहेगा। डीएम ने कहा कि जल शक्ति अभियान के तहत जल संचयन एवं भू-जल पुनर्भरण को लेकर यह कार्यशाला आयोजित की गई है। इसका मूल उद्देश्य जल संरक्षण के लिए आम लोगों को जागरूक करना है।

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