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नीतीश कुमार के 20 साल: दरभंगा ने देखा अभूतपूर्व विकास, बाढ़-पलायन से विकास की राह पर निकला जिला

Published: Wed, 15 Apr 2026 02:38 PM (IST)

नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री के रूप में 20 साल के कार्यकाल का मंगलवार को समापन हुआ। इस दौरान दरभंगा उनकी ...और पढ़ें

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संवाद सहयोगी, बेनीपुर। नीतीश के मुख्यमंत्री के रूप में दो दशकों की लंबी यात्रा मंगलवार को समाप्त हो गई। इस्तीफे के साथ ही बिहार की राजनीति के एक बड़े अध्याय का समापन हुआ। इस 20 साल के दौर में मिथिलांचल, खासकर दरभंगा, उनकी प्राथमिकताओं में हमेशा शामिल रहा।

विकास योजनाओं, सड़क-संपर्क, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जिले ने उल्लेखनीय बदलाव देखा। दरभंगा, जो कभी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझता था, आज बेहतर सड़क नेटवर्क, शैक्षणिक संस्थानों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ नई पहचान बना चुका है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक सड़कों का जाल बिछा, जिससे आवागमन आसान हुआ और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिली।

जीविका से बदली महिलाओं की तस्वीर

मुख्यमंत्री के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में जीविका योजना रही, जिसने दरभंगा की हजारों महिलाओं की जिंदगी बदल दी। बेनीपुर प्रखंड के महिनाम की जीविका दीदी सुनीता देवी, बलनी के प्रेम देवी, माधोपुर के कौशल्या देवी सहित विभिन्न गांव जीविका दीदीयां बताती हैं। पहले घर से बाहर निकलना मुश्किल था, आज हम समूह चलाते हैं, बैंक से जुड़कर खुद कमाई कर रहे हैं। कई दीदियों को मुख्यमंत्री से मिलने और अपनी बात रखने का भी अवसर मिला, जिसे वे जीवन का यादगार क्षण मानती हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार

दरभंगा में विद्यालयों के भवन निर्माण, शिक्षकों की नियुक्ति और छात्राओं के लिए साइकिल-ड्रेस योजना ने शिक्षा का स्तर बढ़ाया। वहीं, डीएमसीएच (दरभंगा मेडिकल कॉलेज) के विस्तार और अनुमंडलीय अस्पताल का विधिवत उदघाटन से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार एवं आसपास के जिलों को भी राहत मिली।

लोगों की यादों में ‘सुलभ मुख्यमंत्री’

स्थानीय लोगों के बीच नीतीश कुमार एक सुलभ और जमीन से जुड़े नेता के रूप में याद किए जाते हैं। दरभंगा के हायाघाट निवासी स्वर्गीय प्रो उमाकांत चौधरी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच संबंध को राजनीतीक के साथ साथ व्यक्तिगत निकटता के रुप में भी देखा जा रहा हैं। प्रो उमाकांत चौधरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का भरोसेमंद शिक्षाविदों और स्थानीय सलाहकारों के रुप में गिना जाता रहा।

शिक्षा एवं सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता के कारण नीतीश कुमार से उनका लगातार संपर्क बना रहा। जब भी मुख्यमंत्री का दरभंगा दौरा होता था तो प्रो चौधरी से मुलाकात और स्थानीय फीड बैक लेना एक सामान्य बात मानी जाती थी। प्रो चौधरी न केवल शौक्षणिक विषयों पर बल्की क्षेत्रीय समस्याओं जैसे बाढ़, सड़क और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी नीतीश कुमार तक बात पहुंचाते थे।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह रिस्ता सिर्फ औपचारिक नहीं था बल्की आपसी विश्वास और लंबें समय के संबाद पर आधारित था। यही वजह था की हायाघाट और आसपास के इलाकों के क ई मुद्दे मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचते रहे।

प्रो उमाकांत चौधरी को स्वर्गीय हो जाने बाद उनके पुत्र स्वर्गीय प्रो विनोद चौधरी‌ का मुख्यमंत्री से संबंध बना रहा और वे दरभंगा से एम एल सी भी रहे। और फिर एम एल सी प्रो विनोद चौधरी को स्वर्गीय होने के बाद प्रो विनय कुमार चौधरी 3 बार विधायक पद पर चुनाव लड़ें जिसमें बेनीपुर से लगातार दो बार चुनाव जीते।

कहां से चला था, कहां पहुंचा दरभंगा

कभी बाढ़, बदहाल सड़क और पलायन के लिए पहचाना जाने वाला दरभंगा आज बुनियादी ढांचे के मामले में काफी आगे बढ़ चुका है। हालांकि, अभी भी रोजगार और उद्योग के क्षेत्र में अपेक्षाएं बाकी हैं, लेकिन बीते 20 वर्षों में बदलाव स्पष्ट दिखता है।

एक दौर का अंत, यादों का सिलसिला जारी

नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से विदा लेने के साथ ही दरभंगा में उनके कार्यकाल की उपलब्धियां और यादें लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। विकास की यह कहानी आने वाले वर्षों में भी जिले की पहचान का हिस्सा बनी रहेगी।

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