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दरभंगा में डेढ़ सौ एकड़ के मोईन पोखर पर एनजीटी का शिकंजा, नगर आयुक्त से मांगा जाएगा पूरा हिसाब

Published: Wed, 30 Sep 2026 08:49 PM (IST)

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दरभंगा के मोईन पोखर पर अतिक्रमण और खरीद-बिक्री के मामले में नगर आयुक्त को व्यक्तिगत ...और पढ़ें

दरभंगा जिले में मोईन पोखर।

दरभंगा जिले में मोईन पोखर।

संवाद सहयोगी, दरभंगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी), पूर्वी जोन, कोलकाता ने मोईन पोखर के अतिक्रमण और खरीद-बिक्री के मामले में नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। तालाब बचाओ अभियान द्वारा दायर ओए 14/26 की सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने दरभंगा नगर निगम की कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया।

अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी, जिसमें नगर आयुक्त को कोर्ट में हाजिर होकर पुराने रेवेन्यू रिकार्ड्स, अतिक्रमण से संबंधित जानकारी और मोईन पोखर के डिमार्केशन की स्थिति पर जानकारी प्रस्तुत करनी होगी।

मोईन पोखर एक प्राकृतिक वेटलैंड है, जिसका क्षेत्रफल डेढ़ सौ एकड़ से अधिक है। यह पोखर दरभंगा सदर और बहादुरपुर अंचल में फैला हुआ है। एनजीटी ने 2025 तक मोईन पोखर के रकबे का सीमांकन करने और इसे अतिक्रमणमुक्त करने का आदेश दिया था, लेकिन अब तक इसका सीमांकन नहीं किया गया है। इसी कारण न्यायालय ने नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देने का आदेश दिया है।

तालाब बचाओ अभियान के अधिवक्ता कमलेश कुमार मिश्र और रेणु ने इस मामले की जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, तासीम नवाब ने प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष भी अतिक्रमण वाद दायर किया था।

आयुक्त के आदेश पर डीसीएलआर ने सदर और बहादुरपुर के अंचलाधिकारी को मोईन पोखर की नापी कर अतिक्रमणकारियों को चिह्नित करने का निर्देश दिया था। हालांकि, विडंबना यह है कि दोनों अंचलाधिकारी ने पोखर की ओर जाने की जहमत नहीं उठाई।

कुछ कर्मचारी गए, लेकिन उन्होंने अतिक्रमणकारियों का नाम पूछने में ही समय बर्बाद किया। एनजीटी के हालिया आदेश और नए नगर आयुक्त के तेवर से यह स्पष्ट है कि अब मोईन पोखर को भरकर बेचने वाले भूमाफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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