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संजय मिश्रा राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद पहली बार पहुंचे दरभंगा, लुंगी और टी शर्ट में दिखा देसी लुक

Published: Mon, 26 Oct 2026 02:57 PM (IST)

Actor Sanjay Mishra News: राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता संजय मिश्रा अपने पैतृक गांव दरभंगा के नारायणपुर पहुंचे, जहां उनका देसी ...और पढ़ें

HighLights

  1. संजय मिश्रा राष्ट्रीय पुरस्कार के बाद पहली बार गांव पहुंचे।

  2. दरभंगा के नारायणपुर में उनका देसी, सादगी भरा लुक।

  3. बचपन का नाम 'घूटन', जड़ों से गहरा जुड़ाव।

डिजिटल डेस्क, दरभंगा। Sanjay Mishra Darbhanga Narayanpur Village: राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित होने वाले बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय मिश्रा हाल में संपन्न दुर्गा पूजा के मौके पर पहली बार अपने पैतृक गांव दरभंगा पहुंचे थे।

उनके यहां आने और देसी लुक का वीडियो सोशल मीडिया अब वायरल हो रहा है। जिसमें उनका बिल्कुल देसी और सादगी भरा अंदाज देखने को मिल रहा है जो लोगों के दिलों पर छा गया है।

Sanja mishra in Darbhanga

दालान में बच्चों संग बैठे

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता संजय मिश्रा जब मनीगाछी प्रखंड के नारायणपुर गांव पहुंचे तो वे लुंगी और टी-शर्ट पहने नजर आए। गांव के दालान में बच्चों और बुजुर्गों के बीच उनकी यह सादगी हर किसी का दिल मोह रही है।

बचपन का नाम 'घूटन'

संजय मिश्रा की जड़ें दरभंगा जिले के मनीगाछी प्रखंड के सकरी के पास स्थित नारायणपुर गांव से जुड़ी हैं। बचपन में प्यार से उन्हें 'घूटन' कहा जाता था। छोटे से गांव की गलियों से निकलकर देश के सबसे बड़े मंच तक का उनका सफर हर युवा के लिए बड़ी प्रेरणा है।

राष्ट्रपति के हाथों सम्मान

हाल ही में गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के पुरस्कार से नवाजा है। यह ऐतिहासिक क्षण संपूर्ण मिथिलांचल के लिए बेहद गर्व का विषय है।

Sanjay mishra jee

समृद्ध पारिवारिक पृष्ठभूमि

संजय मिश्रा की पारिवारिक पृष्ठभूमि काफी समृद्ध रही है। उनके स्वजन राजीव मिश्रा के अनुसार, उनके पिता स्व. शंभुनाथ मिश्रा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में थे और पत्रकारिता से जुड़े थे। उनके दादा स्व. जगदीप नारायण मिश्रा संयुक्त बिहार-झारखंड के रांची कमिश्नर रहे थे।

बनारस की गलियों का असर

उनका बचपन पटना, बनारस और दिल्ली में बीता। पटना के सेंट जेवियर्स से शुरुआती पढ़ाई के बाद बनारस के घाटों, रामलीला और साधु-संतों के हाव-भाव को उन्होंने करीब से ऑब्जर्व किया। यही जमीनी अनुभव आगे चलकर उनके अभिनय की बड़ी रीढ़ बना।

एनएसडी से मिला निखार

नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से अभिनय का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने टीवी और फिल्मों का रुख किया। 'ऑफिस-ऑफिस' के 'शुक्लाजी' से लेकर 'आंखों देखी', 'मसान' और 'वध' जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने बहुआयामी अभिनय का लोहा मनवाया है।

'भक्षक' में निभाई पत्रकारिता

चर्चित फिल्म 'भक्षक' में संजय मिश्रा ने 'भास्कर सिन्हा' नाम के एक संवेदनशील, साहसी और जमीनी पत्रकार की शानदार भूमिका निभाई। सामाजिक सरोकार और सच को सामने लाने वाले इस किरदार के लिए ही उन्हें राष्ट्रीय स्तर का यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है।

अपनी जड़ों से गहरा लगाव

राष्ट्रीय ख्याति और शोहरत पाने के बाद भी संजय मिश्रा का अपनी मिट्टी से गहरा जुड़ाव है। पुरस्कार मिलने के बाद पहली बार गांव पहुंचे अपने 'घूटन' को लुंगी-टीशर्ट में अपनों के बीच पाकर नारायणपुर और आसपास के ग्रामीण फूले नहीं समा रहे हैं।

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