सीबीएसई में अब आठवीं तक मातृभाषा मैथिली की पढ़ाई, शिक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला
केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने सांसद डा. गोपालजी ठाकुर को सूचित किया है कि सीबीएसई पाठ्यक्रम में पहली से ...और पढ़ें

केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी को पत्र सौंपते सांसद डा. गोपालजी ठाकुर। फाइल फोटो-सौ. निजी सचिव।
HighLights
सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली मातृभाषा के रूप में शामिल।
पहली से आठवीं कक्षा तक मिलेगी मैथिली को मान्यता।
एनसीईआरटी 22 अनुसूचित भाषाओं में कर रहा अनुवाद।
जागरण संवाददाता, दरभंगा । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में पहली से आठवीं कक्षा तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता प्रदान की गई है।
सांसद सह लोकसभा में पार्टी सचेतक डा. गोपाल जी ठाकुर को केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है।
मंत्री चौधरी ने अपने पत्र में कहा है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) इस संबंध में जांच कराए जाने के बाद अवगत कराया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 की अनुशंसा के अनुसार कक्षा पांचवीं तक तथा यथासंभव कक्षा आठवीं तक विद्यार्थियों को मातृभाषा को शिक्षण का माध्यम बनाया जाएगा।
यह जानकारी सांसद के हवाले से उनके निजी सचिव ने एक विज्ञप्ति में दी है। सांसद डा. ठाकुर ने शिक्षा राज्य मंत्री के पत्र का हवाला देते हुए कहा है कि मैथिली संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 22 भाषाओं में से एक है।
एनसीईआरटी ने मैथिली सहित 121 भारतीय भाषाओं में प्राइमर विकसित किए हैं। इसके अतिरिक्त एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों का अनुवाद मैथिली सहित 22 अनुसूचित भाषाओं में किया जा रहा है।
एनसीईआरटी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (स्कूल शिक्षा) 2023 के क्रियान्वयन में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को शैक्षणिक सहयोग प्रदान करता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार, मैथिली भाषा को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अवगत कराया है कि बोर्ड द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से माध्यमिक स्तर पर सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली विषय को सम्मिलित किया गया है। मैथिली भाषा का पाठ्यक्रम सीबीएसई की अकादमिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है।
सांसद डा. ठाकुर ने इस संबंध में अपने पहल और प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान तथा शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी को आठ फरवरी 2026 को भेंट कर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को विषय के रूप में शामिल किये जाने के संबंध में पत्र सौंपकर मिथिलावासियों की भावना से अवगत कराया था जिसके बाद इस तरह का सकारात्मक परिणाम सामने आया है।
उन्होंने शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारतीय भाषाओं के संवर्धन, संरक्षण तथा विद्यार्थियों के समग्र शैक्षिक हितों को सुनिश्चित करने के लिए गए इस निर्णय को साढ़े आठ करोड़ मिथिलावासियों का सम्मान बताया है। कहा कि आने वाले समय में मैथिलीभाषियों के लिए मोदी सरकार का यह कदम वरदान साबित होगा।
