दरभंगा में विश्वविद्यालय के आदेश की अनदेखी, एक कालेज ने चुप्पी साधी तो दूसरे ने दिखाई ‘लिपिकीय चतुराई’
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सख्त निर्देशों के बावजूद दरभंगा के दो संबद्ध कॉलेज सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य और कर्मियों को हटाने ...और पढ़ें

यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।
HighLights
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के आदेशों की लगातार अनदेखी।
दो कॉलेज सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, कर्मियों को नहीं हटा रहे।
विश्वविद्यालय शासी निकाय भंग कर सख्त कार्रवाई करेगा।
जागरण संवाददाता, दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सख्त निर्देशों के बावजूद संबद्ध कालेजों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। विश्वविद्यालय क्षेत्र के लगभग तीन दर्जन कालेजों में से दो कालेज सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य, शिक्षक व शिक्षकेतर कर्मियों से काम नहीं लेने के आदेश की लगातार अनदेखी कर रहे हैं।
इनमें से एक कालेज ने विश्वविद्यालय के नोटिस का जवाब देना तक उचित नहीं समझा, वहीं दूसरे ने न्यायादेश व प्रबंधन समिति की अनुमति का हवाला देकर लिपिकीय चतुराई दिखाई है।
विश्वविद्यालय ने इससे पूर्व एक अगस्त को पत्र भेजकर सेवानिवृत्त कर्मियों को तत्काल पदमुक्त कर रिपोर्ट मांगी थी। अनुपालन न होने पर कुलपति के आदेश से कुलसचिव ने तीन सितंबर को कड़ा स्मार-पत्र (रिमाइंडर) जारी किया।
इसमें स्पष्ट किया गया था कि तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट न भेजने वाले कालेजों की शासी निकाय को भंग कर वहां 'तदर्थ समिति' गठित कर दी जाएगी। विश्वविद्यालय ने यह भी साफ किया था कि जिन कालेजों में ऐसा कोई मामला नहीं है, उन्हें भी 'शून्य रिपोर्ट' देना अनिवार्य है।
एक ने साधी चुप्पी, दूसरे ने दिया न्यायादेश का हवाला
विश्वविद्यालय के कड़े रुख के बाद अधिकांश कालेजों ने देर-सबेर अपनी रिपोर्ट जमा करा दी है। हालांकि, दो कालेजों का अड़ियल रवैया बरकरार है। पहला कालेज आदेश और चेतावनी के बावजूद पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। वहीं दूसरा कालेज कार्यरत सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य ने न्यायादेश और प्रबंधन समिति की अनुमति की बात कहकर मामले की महज खानापूरी कर दी।
जल्द होगी आगे की कार्रवाई
मामले पर विश्वविद्यालय के कालेज निरीक्षक प्रो. अरुण कुमार सिंह ने बताया कि एक को छोड़कर सभी कालेजों के जवाब प्राप्त हो चुके हैं। एक कालेज ने न्यायादेश के आधार पर अपना पक्ष रखा है।
विभागीय कार्यों की व्यस्तता के कारण अभी प्राप्त जवाबों का पूरी तरह से अवलोकन नहीं हो सका है। जल्द ही समीक्षा कर समेकित प्रतिवेदन कुलपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद विश्वविद्यालय के नियमानुसार आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।
