दरभंगा। खाद्यान्न की कालाबाजारी और घोटाले का मामला लगातार सामने आ रहा है। बावजूद इसके सत्ता से जुड़े लोगों के कानों पर बिहार के अब तक के सबसे बड़े घोटाले की जूं तक नहीं रेंग रहा। विपक्ष के लोगों ने भी अपेक्षित दबाव नहीं बनाया । लेकिन बिहार की सत्ता ऐसे संवेदनशील मुख्यमंत्री के हाथ में है जो दूध का दूध और पानी का पानी करना जानते हैं। वह निश्चित रूप से ़गरीबों के निवाले के घोटाले की जांच कराएंगे। अन्यथा मजबूरी में मुझे न्यायालय की शरण में जाना पड़ेगा । पूर्व विधायक तथा राजद नेता अमरनाथ गामी ने शनिवार को अपने दरभंगा शहर स्थित आवास पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उक्त बातें कहीं । उन्होंने कहा कि अनाज घोटाला केवल दरभंगा में नहीं हो रहा है इसके तार संपूर्ण बिहार में फैले हुए हैं । नीचे के स्तर का अधिकारी क्या करेगा डीलर तो बेचारा बाली का बकरा बनता है । इस घोटाले को ऊपर से संरक्षण मिला हुआ है। जन वितरण प्रणाली की दुकानों में जब पॉश मशीन की व्यवस्था है तब घोटाला कैसे हो रहा है यह अपने आप में बिहार के लोगों को बहुत कुछ सोंचने और समझने केल इए आमंत्रित करता है । प्रत्येक वर्ष एक लाख क्विटल अनाज की हेराफेरी होती है। यह हेरा फेरी गोदाम स्तर से नहीं होती है बल्कि आवंटन और वितरण में भेद भाव कर के फर्जी कार्ड के माध्यम से घोटाले का सारा खेल खेला जा रहा है । इसमें मात्र जिला स्तर के पदाधिकारी ही सम्मिलित नहीं हैं बल्कि पूरे खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की संलिप्तता है। अपने आरोपों के समर्थन में अभिलेख दर्शाते हुए विधायक श्री गामी ने कहा कि डीलर के यहां पिछले माह का स्टॉक शेष रहते हुए उसे फिर आवंटन दे दिया जाना घोटाले की असल जड़ है । अप्रैल माह में केंद्र सरकार ने गरीबों को मुफ्त अनाज देने की घोषणा की थी । इस अनाज का आवंटन डीलरों को किया गया। जो डीलर बांट सका वह बंटा शेष स्टॉक बच गया उसके बावजूद फिर उसे नया आवंटन दे दिया गया। यह सारा गड़बड़झाला बड़ी एजेंसी की जांच के बाद ही सामने आएगा।

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