दरभंगा। पूरी अकीदत के साथ ईद उल अजहा की नमाज के बाद बुधवार को जानवरों की कुर्बानी दी जाएगी। इसकी सभी तैयारी लगभग मुकम्मल कर ली गई है। ईदगाहों एवं मस्जिदों की साफ सफाई करके पूरी तरह तैयार कर दी गई है। ईदगाह एवं मस्जिदों में नमाज अदा करने के लिए समय का भी ऐलान कर दिया गया है। बकरीद की नमाज के बाद लोग अपने-अपने घरों में बकरे की कुर्बानी अकीदत के साथ करेंगे। इसका भी इंतजाम लगभग सभी ने मुकम्मल कर लिया है। अपनी हैसियत के अनुसार लोगों ने कुर्बानी के लिए बकरे की भी खरीदारी कर ली है। जानकारी के अनुसार, शहर में सर्वप्रथम इस्माइलगंज ईदगाह, किलाघाट मदरसा हमीदिया व जेठयाही मस्जिद और मोहल्ला चकजोहड़ा सल्फिया में सुबह 7 बजे ईदैन की नमाज अदा की जाएगी। 7:15 बजे खानकाह समरकंदिया, वाजिदपुर महदौली ईदगाह में नमाज अदा करने का समय तय किया गया है। लालबाग जामा मस्जिद, मिर्जा खां तालाब ईदगाह, मिरग्यास चक मस्जिद, बेला नवागढ़ी में नमाज के लिए 7:30 बजे का समय निर्धारित है। बाकरगंज जामा मस्जिद, दरभंगा टावर जामा मस्जिद एवं टाउन थाना मस्जिद में 7:45 बजे नमाज अदा की जाएगी। झगरुआ मस्जिद में बकरीद की नमाज 8:30 बजे अदा की जाएगी। बकरा मंडी में इस साल रही सलमान की धूम बकरा मंडी में इस साल सलमान की धूम रही। सलमान नामक बकरा 65 हजार मूल्य वसूलने वाला बना तो शाहरुख बकरा को 58 हजार का खरीदार मिल गया। दाम वसूली के मामले में रणवीर एवं आमिर नामक बकरा भी पीछे नहीं रहा। उनको भी क्रमश: 56 एवं 55 हजार के खरीदार मिल गए। बकरीद की पूर्व संध्या पर बाकरगंज एवं दरभंगा टावर पर सजी बकरा मंडी में लोगों ने अपनी हैसियत के अनुरूप दिल खोलकर बकरा खरीदने में पैसा खर्च किया। बकरे की कीमत लोगों ने कद, नस्ल एवं सुंदरता पर मोहित होकर चुकाए। कुर्बानी के लिए बकरा खरीदारी करते समय लोगों ने जरा भी कंजूसी नहीं की। यही कारण था कि जमुनापारी नस्ल का सलमान बकरा 65,000 कीमत वसूलने में कामयाब रहा। देसी नस्ल के शाहरुख को भी 58,000 में खरीदने वाला मिल गया। गठीले रणवीर एवं आमिर को भी 56 एवं 55,000 के ऊंचे दाम पर लोगों ने हाथों हाथ लिया। औसतन बकरे की कीमत 8000 से 22000 के बीच रही। मंडी में हालांकि महंगाई का असर साफ नजर आया। दुमदुमा के मोहम्मद नफीस ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार कुछ अधिक ही महंगाई का असर है। तारालाही की जूनिया देवी तीनों बकरे बेचकर घर जा रही थी। उन्हें लगता है कि महंगाई के हिसाब से दाम नहीं मिला। सुंदरपुर के जमीर ने अपने आधा दर्जन बकरे बेचकर खुशी- खुशी बकरीद की खरीदारी करने बाजार चल दिए। मोहम्मद महताब ने 35000 में दो बकरा खरीद कर घर जा रहे थे उन्हें 35000 खर्च होने का मलाल नहीं था। जैसा सोच कर घर से आए थे, दरभंगा टावर पर मनपसंद बकरा मिल गया।

Posted By: Jagran