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दरभंगा DMCH में गाली-गलौज से नाराज जूनियर डॉक्टरों ने ठप किया इमरजेंसी, 11 घंटे से मरीज बेहाल

Published: Thu, 24 Sep 2026 10:14 AM (IST)

दरभंगा के डीएमसीएच इमरजेंसी में महिला स्वजन के गाली-गलौज से नाराज जूनियर डॉक्टरों ने उपचार ठप कर दिया है, जिससे ...और पढ़ें

HighLights

  1. महिला स्वजन के गाली-गलौज से जूनियर डॉक्टर नाराज हुए।

  2. डीएमसीएच इमरजेंसी में 11 घंटे से उपचार ठप है।

  3. डॉक्टर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम की मांग पर अड़े हैं।

संवाद सहयोगी, दरभंगा। डीएमसीएच इमरजेंसी में महिला स्वजन के गाली-गलौज से भड़के जूनियर डाक्टरों ने बुधवार देर रात उपचार ठप कर दिया। इससे गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। लगातार करीब 11 घंटे से इमरजेंसी बंद रहने से गंभीर मरीज बेहाल बने हैं। 

बताया जाता है कि बुधवार रात करीब 10 :30 बजे एक महिला स्वजन मरीज की पर्ची लेकर डाक्टर कक्ष में पहुंची। वहां देरी होने पर वह आक्रोशित हाेकर गाली देने लगी। इससे ड्यूटी पर तैनात जूनियर चिकित्सकों में रोष फैल गया। 

स्वजन और डॉक्टरों के बीच तू-तू, मैं-मैं

मरीज के तीन-चार महिला स्वजन और डॉक्टरों के बीच तू-तू, मैं-मैं से अफरा-तफरी मच गई। परीक्षण कक्ष और ट्राइज एरिया में इलाजरत मरीज और स्वजन दहशत में आ गए। 

हंगामा की सूचना पर सुरक्षा सुपरवाइजर महेश सिंह ने गार्डों के साथ मोर्चा संभाला। फिर बेंता थानाध्यक्ष विनय कुमार मिश्रा ने सदल पहुंच कर स्थिति कंट्रोल किया। इसके बाद जूनियर डाक्टर इलाज बंदकर हड़ताल पर चले गए। 

जूनियर डॉक्टरों ने फिर कार्य बंद कर दिया

इसकी जानकारी होने पर अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र, डीएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा और डॉ. कमरुद्दीन ने इमरजेंसी पहुंचकर डॉक्टरों से बातचीत की। सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने का आश्वासन देकर मनाया। जिसके बाद स्थिति थोड़ी सामान्य हुई और करीब रात 12 :30 बजे इलाज शुरू हुआ। 

अधिकारियों के लौटते ही जूनियर डॉक्टरों ने फिर कार्य बंद कर दिया। जिसके बाद से इमरजेंसी में उपचार बंद है और पुलिस बल तैनात है। गुरुवार सुबह गाली-गलौज की आरोपी महिला स्वजन के मरीज को मेडिसिन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।  इमरजेंसी के परीक्षण कक्ष, ट्राइज एरिया और सीसीडब्ल्यू के बेड से अन्य मरीजों को भी विभिन्न संबंधित वार्डों में शिफ्ट कर दिया गया है।

इधर, जूनियर डॉक्टरों को मनाने में डीएमसीएच के अधिकारी और वरीय चिकित्सक जुटे हुए हैं। जबकि जूनियर पुख्ता सुरक्षा इंतजाम पर अड़े हैं। सेंट्रल ओपीडी और वार्ड की व्यवस्था अब तक सुचारू है।

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