दरभंगा। विकास की बनती बिगड़ती सूरत के बीच हायाघाट विधानसभा में कई काम हुए। लेकिन, आज के इस आधुनिक युग में भी इलाके की एक बड़ी आबादी नाव पर निर्भर करती है। यहां नाव के सहारे जिदगानी चलती है। अधवारा समूह नदी के सिरनियां घाट पर आने के साथ बाढ़ की त्रासदी की जमीनी हकीकत नजर आती है। यह एक ऐसी घाट है जिसने आधा दर्जन गांव के लोगों की जिदगानी को नाव के सहारे ही सही स्थिर रखा है। बावजूद इसके कि इस घाट से नाव की सवारी करना खतरे से खाली नहीं है। लोग जान की बाजी पर आवागमन करते हैं। यहां से प्रतिदिन सिरनियां, घरारी, अम्माडीह, नेयाम, सरायहामिद, गोड़हारी, उचौली, छतौना, बहपती आदि गांवों के सैकड़ों लोग आते-जाते हैं। पुल का इंतजार, सरकारी नाव का इंतजाम नहीं इलाके के लोग लंबे समय से इस घाट पर एक अदद पुल का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन, लोगों की इस इच्छा की पूर्ति नहीं हो पाई है। उपर से सबकुछ जानते हुए भी यहां के लिए अबतक सरकारी नाव का इंतजाम नहीं हो सका है। आम आदमी निजी नाव से किराया देकर पार होता है। दिन में तो जैसे- तैसे लोग पार उतर जाते हैं। लेकिन, रात होने पर इनकी परेशानी बढ़ जाती है। नदी किनारे गुजारनी पड़ती है रात, बीमार के लिए खटिया का सहारा सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब कोई इमरजेंसी होती है। कोई महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती है या कोई बीमार होता है तो उसे खटिया पर लादकर नदी के किनारे पर रखा जाता है। नाविक को फोन किया जाता है। जब-तक नाविक तैयार हो नाव लेकर आता है। तब-तक स्थिति और नाजुक हो जाती है। वहीं कभी-कभी तो बाजार से लौटने के क्रम में देरी हो जाने के कारण लोगों को नदी किनारे अवस्थित किसी के घर या दरवाजे पर ही रात गुजारने की मजबूरी बन आती है। स्कूली बच्चे भी नाव के हवाले, नदी की बीच धारा में लगता है डर स्थानीय लोग बताते हैं कि पुल का नहीं होना इलाके के लिए अभिशाप है। स्कूल व ट्यूशन के लिए भी बच्चों को नाव की सवारी करनी पड़ती है। लोग नौका पर सवार तो हो जाते हैं। लेकिन, जैसे ही नाव बीच में पहुंचती है लोगों को जिदगी का आखिर पल सामने नजर आने लगता है। यात्रियों से भरी छोटी नाव किस खेप को गहरे पानी में डूबो देगी कहा नहीं जा सकता। यहां से खुलनेवाली हर नाव को नाविक बड़ी मुश्किल से पार कराता है। जब दर्जन भर से अधिक लोगों को लेकर नाविक नाव को खेता है तो बीच नदी में पहुंचने पर नाव डोलने लगती है। लोगों की संख्या व गहरे पानी को देखते हुए यहां एक बड़ी नाव की जरूरत है। यदि समय रहते नौका नहीं बदला जा सका तो किसी भी कोई बड़ी घटना हो जाएगी। --------------- उक्त पुल के निर्माण को लेकर उन्होंने विधानसभा में आवाज उठाई थी। सरकार तक उक्त मुद्दे को पहुंचाने का काम किया। राशि उपलब्ध हो जाने के बाद ही उक्त घाट पर पुल निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। अमरनाथ गामी, विधायक ------- पुल निर्माण नहीं होने से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या की बाबत सूबे के मंत्री के समक्ष अपनी बात रखी। लेकिन, काम नहीं हो सका। शफीउर्रहमान उर्फ बौआ मियां मुखिया ------------------- लगाते रहे गुहार, नहीं हुआ समस्या का समाधान ग्रामीणों ने उक्त घाट पर पुल निर्माण के लिए जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखा। कई बार मिले भी। परंतु पुल के निर्माण की दिशा में अब-तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। शनिचर यादव, घरारी

सरकार से एक उम्मीद की किरण जगी कि उक्त घाट पर पुल बनेगा। हमलोगों को नाव की यत्रा से निजात मिलेगी। लेकिन अबतक सरकार की ओर से इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया गया है। मनीष कुमार यादव छात्र अपना दुखड़ा किसको सुनाऊं। जिसको दर्द होता है,वही जानता है। कई वर्षों से हमलोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं, अब देखना है कि सरकार इसे कब पूरा करती है। चांदनी देवी घरारी

पुल जब-तक बन नहीं जाता है, तबतक जिला प्रशासन एक बड़ी सरकारी नाव उपलब्ध करा दे। ताकि हमारे इलाके के लोगों को थोड़ी राहत मिले। मो. असलम सिरनियां टोला उक्त घाट पर पुल का निर्माण हो जाने से दर्जनों गांव के लोगों के लिए दरभंगा तक का सफर आसान हो जाएगा। सियाराम यादव, घरारी । ---------

वोटर एक नजर में

पुरूष महिला थर्ड जेंडर

127580 114162 4

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस