दरभंगा की बेटी नेहा ने खेल कोटे से हासिल की CRPF की वर्दी, नेशनल में जीता था गोल्ड मेडल
Neha Chaudhary CRPF Darbhanga: दरभंगा की नेहा चौधरी ने अपनी खेल प्रतिभा से देश सेवा का मार्ग चुना, हाईजंप में ...और पढ़ें

उत्कृष्ट कार्य के लिए नेहा को प्रशंसा पत्र देते सीआरपीएफ के डीआइजी जयदेव केसरी। (फाइल फोटो)। सौ. स्वजन।
HighLights
नेहा चौधरी ने खेल कोटे से CRPF में देश सेवा का मार्ग चुना।
उन्होंने वर्ष 2011 में नेशनल हाईजंप प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।
यह सफलता ग्रामीण परिवेश की बेटियों के लिए एक बड़ी मिसाल है।
संवाद सहयोगी, बेनीपुर (दरभंगा)। Sports Quota CRPF Selection: यदि बेटियों को परिवार का पूरा सहयोग, सही मार्गदर्शन और अपनी प्रतिभा दिखाने का उचित अवसर मिले, तो वे हर क्षेत्र में सफलता की नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।
दरभंगा जिले के बेनीपुर प्रखंड अंतर्गत पोखराम गांव की रहने वाली नेहा चौधरी ने खेल के मैदान में शानदार उपलब्धियां हासिल करने के बाद देश सेवा का गौरवशाली मार्ग चुनकर इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिया है। उनकी यह प्रेरणादायक सफलता आज पूरे क्षेत्र की बेटियों के लिए मिसाल बन गई है।
लगातार दो वर्षों तक नेशनल में गोल्ड
नेहा चौधरी ने अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए वर्ष 2010 में झारखंड के पूर्वी क्षेत्र में आयोजित हाईजंप रीजनल चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया था।
इसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन को जारी रखते हुए वर्ष 2011 में नेशनल हाईजंप प्रतियोगिता में भी स्वर्ण पदक हासिल किया।
लगातार दो वर्षों तक मिली इस बड़ी सफलता ने उनके खेल के प्रति समर्पण और अजेय जज्बे को साबित कर दिया।

जमशेदपुर से की शुरुआती पढ़ाई
नेहा ने अपनी स्कूली शिक्षा झारखंड के जमशेदपुर स्थित डीबीएमएस स्कूल से प्लस टू तक पूरी की। शिक्षा के साथ-साथ खेल गतिविधियों में बढ़-चढ़कर सक्रिय रहने के कारण उन्होंने विद्यार्थी जीवन से ही अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बना ली थी।
अपनी खेल प्रतिभा के बल पर ही वर्ष 2014 में उनका चयन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में हुआ और तब से वह पूरी निष्ठा के साथ वर्दी पहनकर देश की सेवा में जुटी हैं।
शिक्षकों के परिवार से ताल्लुक
नेहा के पिता विमलेश चौधरी और माता कंचन देवी दोनों ही शिक्षक पेश से जुड़े हैं। बेटी की इस शानदार खेल उपलब्धि और सीआरपीएफ में देश सेवा के सफर से न केवल उनका पूरा परिवार, बल्कि पोखराम गांव का हर एक शख्स गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
नेहा की यह जीवन यात्रा यह साबित करती है कि ग्रामीण परिवेश की बेटियां भी कड़ी मेहनत, अटूट आत्मविश्वास और परिवार के प्रोत्साहन से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं।
अपनी इस सफलता पर बात करते हुए नेहा ने कहा, "हाईजंप प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल हासिल करना मेरे जीवन का बेहद गर्व का क्षण था, जिसके लिए मैंने काफी पसीना बहाया था।
वर्ष 2014 में सीआरपीएफ में शामिल होने के बाद मुझे देश सेवा का जो अवसर मिला, उसे मैं अपना बड़ा सौभाग्य मानती हूं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि आज के समय में हर बेटी को अपने सपने पूरे करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
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