एमबीबीएस में दाखिला मिला, पर रहने की जगह नहीं, डीएमसी के नए मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी चुनौती
नए सत्र 2026-27 के लिए दरभंगा मेडिकल कॉलेज (डीएमसी) में एमबीबीएस छात्रों की कक्षाएं शुरू हो गई हैं, लेकिन हॉस्टल ...और पढ़ें

दरभंगा मेडिकल कालेज।
HighLights
डीएमसी में नए एमबीबीएस छात्रों को हॉस्टल नहीं मिला।
पुनर्विकास के कारण पुराने हॉस्टल तोड़े गए, नए में देरी।
छात्रों के अभिभावक सुरक्षा और खर्च को लेकर चिंतित।
राजकुमार गणेशन, दरभंगा। डीएमसी (दरभंगा मेडिकल कालेज) में नये सत्र 2026-27 का शुभारंभ आज से हो रहा है। एमबीबीएस कोर्स के नामांकित 150 छात्र-छात्राओं में वर्ग की शुरुआत होने से उत्सुकता है।
हालांकि, दूर-दराज के स्टूडेंट हास्टल आवंटित नहीं होने से परेशान हैं। इनके सामने सुरक्षित आवास में रहने और खाने जैसी गंभीर बुनियादी समस्या खड़ी हो गई है। साथ ही डीएमसीएच कैंपस से बाहर रहने के चलते इन्हें रोजाना आवाजाही सहित कई मुश्किलें झेलनी पड़ेंगी।
इसके बावजूद डीएमसी प्रशासन ने हास्टल के तौर पर आवास सुविधा उपलब्ध कराने से इन्कार कर दिया है। नामांकन के समय छात्रा-छात्राओं से हास्टल के लिए जरूरी फार्म भी अलग से नहीं भराया गया।
बताया जाता है कि हास्टल फार्म भरने और फीस जमा करने की प्रक्रिया सिर्फ पांच सेंट्रल नामिनी स्टूडेंट ने किया है। जिसमें तीन नागालैंड और दो मेघालय राज्य के विद्यार्थी हैं।
कालेज प्रशासन ने हास्टल में जगह नहीं होने के चलते इन पांचों विद्यार्थी को पावरग्रिड विश्रामगृह में कमरा आवंटित किया है। यहां पहले से ही अन्य सत्रों के दर्जनों स्टूडेंट रह रहे हैं। इस स्थिति से नव नामांकित स्टूडेंट निराश हैं और अभिभावक कालेज के अधिकारियों को फोनकर हास्टल आवंटित करने की रोजाना गुहार लगा रहे हैं।
सुरक्षा को लेकर छात्राओं के अभिभावक चिंतित
दरभंगा मेडिकल कालेज परिसर में स्टूडेंट के लिए कुल 12 हास्टल मौजूद थे। जिसमें से नौ ब्वायज और तीन गर्ल्स हास्टल है। इनमें विभिन्न सत्रों के करीब 500 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था थी। जो कई हास्टलों के ध्वस्त होने से जगह कम गई है।
बता दें कि दरभंगा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में फिलहाल पुनर्विकास और उन्नयन कार्य चल रहा है। जिस वजह से मौजूद हास्टलों को भी तोड़ा जाएगा। जिसके चलते नया भवन निर्माण पूरी होने तक स्टूडेंट हास्टल सुविधा से वंचित रहेंगे।
ऐसे हालात से नव नामांकित करीब 40 छात्राओं के अभिभावक अधिक चिंतित हैं। अनजान शहर में कालेज परिसर से बाहर रहने की जानकारी से छात्राओं के माता-पिता सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं। वहीं मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र बाहर रहने से खर्च बढ़ने से आर्थिक परेशानी उत्पन्न होने की संभावना से घिर गए हैं।
एमबीबीएस सीट बढ़ी पर सालभर गुजरने पर भी नहीं शुरू हुआ हास्टल निर्माण
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) द्वारा एमबीबीएस कोटे में 30 प्रतिशत की वृद्धि करने से डीएमसी के मौजूद सत्र में 30 सीट बढ़ी है। इसके बावजूद हास्टल निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं हुई है।
जबकि डीएमसीएच में उन्नयन कार्य की शुरुआत बिहार चिकित्सा सेवा एवं अवसंरचना निगम लिमिटेड (बीएमएसएलसीएल) द्वारा अप्रैल 2025 में हुई है।
करीब डेढ़ वर्ष गुजरने के बाद भी बीएमएसएलसीएल द्वारा अभी तक सिर्फ मुख्य भवन के पीलर लेबल का कार्य पूरा हो पाया है। बताया जाता है कि निर्माण की गति धीमी है। ऐसी ही स्थिति रही तो हास्टल के बचे भवनों के टूटते ही मेडिकल स्टूडेंट के सामने विषम बुनियादी समस्या खड़ी हो जाएगी।
दरभंगा मेडिकल कालेज में नए भवनों के निर्माण के चलते कई पुराने हास्टल भवन टूट चुके हैं। इसके चलते आवास उपलब्ध नहीं होने से नवीन सत्र के नामांकित स्टूडेंट को हास्टल सुविधा नहीं दी गई है। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग को भी पत्र लिखकर अवगत कराया गया है।
- डा. यूसी झा, प्राचार्य, डीएमसी
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