मिथिला के मखाने की विदेशों में बढ़ रही डिमांड, दुबई-अमेरिका तक हो रहा निर्यात
आधुनिक प्रोसेसिंग और पैकेजिंग के कारण दरभंगा से मखाने का निर्यात अब दुबई, कनाडा सहित कई देशों में हो रहा हैं।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
दरभंगा से मखाना दुबई, कनाडा सहित कई देशों में हो रहा निर्यात।
आधुनिक प्रोसेसिंग, पैकेजिंग से मखाने के उत्पादों में तीन गुना मुनाफा।
राष्ट्रीय मखाना महोत्सव ने मिथिला मखाना को दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान।
जागरण संवाददाता, दरभंगा। पारंपरिक रूप से तालाबों से मखाना निकालना बेहद कठिन काम है। लेकिन अब ऑटोमेटिक पापिंग मशीनों और आधुनिक ग्रेडिंग से प्रोसेसिंग आसान हो गई है।
बेहतरीन पैकेजिंग और ब्रांडिंग के कारण अब दरभंगा सुदूर देहात से लेकर देश के कोने-कोने से सीधे दुबई, कनाडा, मलेशिया, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में मखाना एक्सपोर्ट हो रहा है।
बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ लिमिटेड, दरभंगा से जुड़े उद्यमी ऋषिकेश कश्यप ने बताया कि पहले हम खुला मखाना औने-पौने दाम में बेचते थे।
अब मखाना के 26 व्यंजन बनाकर बेच रहे हैं। जिसमें रोस्टेड, फ्लेवर्ड पेरी-पेरी, पुदीना, चीज मखाना और मखाना कुकीज, लड्डू बनाकर विदेशों में भी सप्लाई कर रहे हैं। जितना प्रोडक्ट है सभी क्वालिटी उक्त है। मुनाफा अब तीन गुणा ज्यादा है।
दरभंगा और मधुबनी की मखाना गुणवता और स्वाद में सबसे अच्छी
बिरौल के नेउरी गांव के महादेव सहनी ने पारंपरिक खेती छोड़ पांच एकड़ में मखाना की खेती की शुरुआत की। बताया कि दरभंगा और मधुबनी की मखाना गुणवता व स्वाद में सबसे अच्छी है।
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र से प्रशिक्षण लेकर आज खुद का ब्रांड चला रहे हैं और सालाना 25 से 30 लाख का टर्नओवर कर रहे हैं।

मधुबनी की प्रगतिशील महिला किसान पूजा कुमारी को सम्मानित करते सांसद और वैज्ञानिक। (जागरण)
मधुबनी की पूजा कुमारी महिला किसान समूह बनाकर मखाने की पैकेजिंग यूनिट शुरू की। आज उनके समूह से 60 महिलाएं जुड़ी हैं, जो आत्मनिर्भर बनकर सीधे दिल्ली के बड़े माल में अपने उत्पाद भेज रही हैं।
राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के विज्ञानी डॉ. एनके सिंह ने बताया कि मखाने की नई उन्नत प्रभेदों जैसे स्वर्ण वैदही व अन्य उच्च उपज वाली किस्मों पर कार्य किया जा रहा है।
इन नई प्रभेदों की विशेषता यह है कि इन्हें गहरे तालाबों के बजाय सामान्य खेतों में केवल एक से दो फीट पानी जमा करके भी उगाया जा सकता है।
यह कीट-प्रतिरोधी है और सामान्य किस्मों की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक पैदावार देती हैं। जिससे लागत कम और मुनाफा ज्यादा होगा।
स्वाद और सेहत का बेजोड़ संगम
मखाना महोत्सव में लगे फूड स्टाल पर लोगों की भीड़ देखी गई। स्टाल पर मखाना बटर मसाला, मखाना कटलेट, कुरकुरी मखाना चाट और मखाना-काजू की शाही रसमलाई, लड्डू आकर्षण का केंद्र रही।
स्टाल पर मखाना के प्रोडक्ट को खरीद कर खा रहे दरभंगा के संतोष कुमार और विभा देवी ने बताया कि हमने कभी नहीं सोचा था कि मखाने से इतनी बेहतरीन लड्डू और तीखे स्नैक्स भी बन सकते हैं। यह स्वाद और सेहत का बेजोड़ संगम है।
फुली-ऑटोमेटिक मशीनों का लाइव प्रदर्शन रहा खास आकर्षण
मिथिलांचल में शरद पूर्णिमा यानी कोजागरा पर्व पर मखाना और पान बांटने की सदियों पुरानी परंपरा है। इसी सांस्कृतिक जुड़ाव को आर्थिक मजबूती देने के लिए विगत तीन साल से अक्टूबर महीने में राष्ट्रीय मखाना महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
इसका मुख्य उद्देश्य देश भर के मखाना उत्पादकों, विज्ञानियों, मशीन निर्माताओं और वैश्विक निर्यातकों को एक मंच पर लाना है ताकि मिथिला मखाना (जीआइ टैग प्राप्त) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट किया जा सके।
वर्ष 2023 में केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र के रूप में दोबारा उन्नत किए जाने के बाद से इस महोत्सव का दायरा बड़ा हो गया है।
इस बार का सबसे खास आकर्षण मखाना प्रोसेसिंग के लिए फुली-ऑटोमेटिक मशीनों का लाइव प्रदर्शन रहा। जिसने पारंपरिक रूप से हाथ जलने की समस्या से देश के मखाना मजदूरों को मुक्ति दिलाने का संदेश दिया।
