दरभंगा की बेटी ने गुजरात के भारत पर्व में बढ़ाया बिहार का मान, पीएम मोदी ने सराही मिथिला पेंटिंग
PM Narendra Modi Bharat Parv: राखी कुमारी ने गुजरात के 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' में 'भारत पर्व-2026' में प्रधानमंत्री मोदी के ...और पढ़ें
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष राखी कुमारी ने अद्भुत मिथिला चित्रकला का जीवंत प्रदर्शन कर पूरे बिहार का नाम रोशन किया।
HighLights
राखी कुमारी ने पीएम मोदी के सामने मिथिला पेंटिंग का प्रदर्शन किया।
प्रधानमंत्री ने राखी की कला और आत्मविश्वास की जमकर सराहना की।
राखी अब अन्य जरूरतमंद लड़कियों को निःशुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं।
जागरण संवाददाता, दरभंगा। Darhbanag Mithila Painting: अभाव और तंगहाली अगर इंसान के इरादों को मजबूत कर दे, तो सफलता इतिहास रचती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बिहार के दरभंगा जिले के कबीरचक की रहने वाली होनहार बेटी राखी कुमारी ने।
गुजरात के एकता नगर स्थित 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' में आयोजित 15 दिवसीय 'भारत पर्व-2026' के उद्घाटन अवसर पर राखी ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष अपनी अद्भुत मिथिला चित्रकला का जीवंत प्रदर्शन कर पूरे बिहार का नाम रोशन किया है।
छठी मैया की थीम
राखी ने बताया कि उन्हें इस राष्ट्रीय पर्व के लिए राष्ट्रीय एकता पर आधारित पेंटिंग तैयार करनी थी, जिसके चलते उन्हें दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहारों पर भी अपने घर से दूर रहना पड़ा।

आयोजन स्थल पर पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उद्घाटन के दिन प्रधानमंत्री के सामने मात्र तीन से चार घंटे के भीतर लाइव पेंटिंग बनानी है।
समय की कमी को देखते हुए उन्होंने 'छठी मैया' का स्मरण किया और बेहद कम समय में छठ पर्व की थीम पर एक अत्यंत मनमोहक पेंटिंग तैयार कर दी।
पीएम मोदी ने सराहा
पेंटिंग के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद वहां रुककर राखी की कला को बारीकी से देखा और उनका हौसला बढ़ाया।
कला के प्रति जिज्ञासा दिखाते हुए प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा कि 'मिथिला पाग' को बनाने में कितना समय लगता है और क्या धोने के बाद इसके रंग फीके पड़ते हैं।
राखी ने प्रधानमंत्री के सभी सवालों के बेहद आत्मविश्वास के साथ जवाब दिए। इस दौरान पर्यटन विभाग की तरफ से राखी द्वारा तैयार पाग-दोपट्टा से प्रधानमंत्री का अभिनंदन भी किया गया।
संघर्ष भरा सफर
राखी कुमारी का शुरुआती जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता महेश महतो एक आरा मशीन पर दैनिक मजदूरी करते हैं, जबकि उनकी माता गायत्री देवी एक गृहिणी हैं।
छह भाई-बहनों में चौथे स्थान पर मौजूद राखी ने साल 2020 में मैट्रिक और 2022 में विज्ञान संकाय से प्रथम श्रेणी में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी।
उनकी इच्छा डॉक्टर बनने की थी, लेकिन कोरोना काल और अत्यंत दयनीय आर्थिक स्थिति के कारण वे मेडिकल कोचिंग की फीस का इंतजाम नहीं कर पाईं।
कला को बनाया हथियार
परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय राखी ने कला को अपना सबसे बड़ा संबल बनाया और आज वे एमएलएसएम कॉलेज से हिंदी में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रही हैं।
उनके इस कलात्मक सफर में 'मैथिल मंच' और इसके संस्थापक ई. मणिभूषण 'राजू' का अहम योगदान रहा है।
दिसंबर 2022 में काम की तलाश के दौरान उन्हें मिथिला पेंटिंग सीखने की सलाह मिली, जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज वे देश के कई बड़े शहरों की प्रदर्शनियों में बिहार का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
दूसरों को दे रहीं प्रशिक्षण
आज राखी न केवल खुद आत्मनिर्भर बन चुकी हैं, बल्कि 'मैथिल मंच आर्ट स्टोर' के जरिए मुफ्त ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रशिक्षण देकर सैकड़ों अन्य जरूरतमंद लड़कियों को भी स्वावलंबी बना रही हैं।
हाल ही में उन्होंने दरभंगा के सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर के पैतृक गांव पररी में 10 दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर का संचालन किया था। अपनी कला के दम पर एक अलग पहचान बनाने वाली राखी का अगला लक्ष्य पीएचडी पूरी कर अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' की उपाधि जोड़ना है।