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दरभंगा के DMCH में न्यूरो सर्जरी से मिल रही राहत, लेकिन चूहों ने ठप कर दी कैथलैब की मशीनें

Published: Sat, 17 Oct 2026 07:00 AM (IST)

Bihar medical facilities : डीएमसीएच दरभंगा के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) यूनिट में सर्जन नहीं ...और पढ़ें

डीएमसीएच के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी वार्ड में भर्ती मरीजों को देखती नर्स।  फोटो -जागरण

डीएमसीएच के बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी वार्ड में भर्ती मरीजों को देखती नर्स। फोटो -जागरण

HighLights

  1. डीएमसीएच कैथलैब की मशीनें चूहों द्वारा तार कुतरने से बंद।

  2. सीटीवीएस यूनिट में विशेषज्ञ सर्जन की तैनाती नहीं, मरीज परेशान।

  3. न्यूरो और बर्न सर्जरी सेवाएं मरीजों को राहत प्रदान कर रही हैं।

राजकुमार गणेशन, दरभंगा। दरभंगा मेडिकल कालेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) यूनिट और कैथलैब की स्थिति ठीक नहीं है।

सीटीवीएस के लिए सर्जन तैनात नहीं है, जबकि चूहों ने कैथलैब की मशीन के तार कुतर दिए हैं। मशीनें फिलहाल बंद हैं और उनकी मरम्मत का जिम्मा बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कार्पोरेशन लिमिटेड को सौंपा गया है।

इस कारण उत्तर बिहार के मरीज सीटीवीएस और कैथलैब की सुविधाओं से वंचित हैं। यहां सामान्य जांच हो रही है, लेकिन गंभीर और जटिल मामलों में मरीजों को बाहर रेफर किया जाता है।

इससे खर्च बढ़ने के साथ उपचार में देरी होती है और मरीजों की जान भी जोखिम में पड़ सकती है। हार्ट सर्जरी या पेसमेकर लगाने की जरूरत पड़ने पर मरीजों को पटना-दिल्ली जाना पड़ता है। अस्पताल के कार्डियोलाजी विभाग में रोजाना करीब 50 से 60 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं।

शुक्रवार को पिता का इलाज कराने आए मधुबनी निवासी राकेश झा ने कहा कि कैथलैब चालू होने से हृदय रोगियों को राहत मिलेगी। उनके पिता को पिछले साल पटना में पेसमेकर लगा था।

डिवाइस की नियमित जांच के लिए डाक्टरों ने हर तीन माह में पटना जाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि कैथलैब सुचारू रहती तो पेसमेकर की जांच के साथ अन्य कार्डियक उपचार भी यहीं संभव होता।

सर्जरी सुविधा से न्यूरो और बर्न मरीजों को राहत

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में न्यूरो सर्जरी और बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी शुरू होने से मरीजों को राहत मिली है। आग से झुलसे और सड़क दुर्घटना में घायल मरीजों को समय पर आपरेशन की सुविधा मिल रही है।

सात सितंबर को न्यूरो सर्जरी आपरेशन थिएटर शुरू होने के बाद से अब तक करीब 45 मरीजों के आपरेशन हो चुके हैं। रोजाना एक-दो मरीज ओटी पहुंचते हैं। इसके चलते 20 बेड का आईसीयू भरने लगा है।

समस्तीपुर निवासी 70 वर्षीय कीर्ति नारायण ठाकुर के पुत्र रामकिशोर ठाकुर ने बताया कि सिर में चोट लगने के बाद उनके पिता सबकुछ भूल गए हैं।

जांच के बाद उन्हें भर्ती किया गया है। पहले दवा से स्वस्थ करने की कोशिश हो रही है और जरूरत पड़ने पर आपरेशन किया जाएगा।

बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी वार्ड में भर्ती सीतामढ़ी के मरीज के परिजन अविनाश झा और रूपेश पाठक ने बताया कि आग से मरीज का हाथ और चेहरा झुलस गया था।

रेफर होकर डीएमसीएच आने पर उन्हें डर था, लेकिन यहां बेहतर इलाज मिल रहा है। सर्जरी सुविधा से तुरंत उपचार संभव हुआ।

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में उपचार बंदोबस्त को बेहतर बनाने की प्रक्रिया चल रही है। सीटीवीएस में चिकित्सकों की तैनाती के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है। कैथलैब की मशीनों की मरम्मत जल्द ही बीएमएसआईसीएल के माध्यम से कराई जाएगी।
— डा. अमित कुमार झा, उपाधीक्षक, डीएमसीएच

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