विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

PM Kisan Samman Nidhi : 2000 रुपये की किस्त जारी करेंगे पीएम , दरभंगा में डिजिटल फार्मर आईडी बनी किसानों की चिंता

Published: Thu, 29 Oct 2026 08:36 PM (IST)

PM Kisan Samman Nidhi : दरभंगा में डिजिटल फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया में भू-अभिलेखों की तकनीकी खामियां किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं।

PM Kisan Beneficiary List : इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

PM Kisan Beneficiary List : इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. डिजिटल फार्मर आईडी से सरकारी लाभ, बिचौलियों की भूमिका समाप्त।

  2. भू-अभिलेखों में तकनीकी खामियां, लगान रसीद में विवरण गायब।

  3. किसानों को कार्यालयों के चक्कर, अधिकारी सुधार में जुटे।

जागरण संवाददाता, दरभंगा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए बड़ी खबर है। शुक्रवार को पीएम मोदी किसानों के खाते में 2000 रुपये की राशि जारी करेंगे। हालांकि, दरभंगा के किसानों के सामने डिजिटल फार्मर आईडी को लेकर चिंता बनी हुई है।

बिहार सरकार के निर्देश पर जिले के रैयत और गैर-रैयत किसानों के लिए डिजिटल फार्मर आइडी (किसान रजिस्ट्री) बनाने की प्रक्रिया चल रही है। इसका उद्देश्य किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, खाद-बीज और अन्य सरकारी अनुदानों का लाभ पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना है।

जिला प्रशासन की ओर से पंचायत स्तर पर कृषि समन्वयक, किसान सलाहकार और हल्का कर्मचारियों की मौजूदगी में माइक्रो प्लान के तहत विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में किसानों के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कर रजिस्ट्री बनाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

डिजिटल फार्मर आइडी को कृषि क्षेत्र में बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। हालांकि, धरातल पर तकनीकी खामियां, पुराने भू-अभिलेख और आनलाइन लगान रसीद में विसंगतियां किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई हैं।

बड़ी संख्या में किसान वसुधा केंद्रों, साइबर कैफे और अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। किसी की लगान रसीद में जमीन का खाता, खेसरा और रकबा दर्ज नहीं है, तो किसी की पैतृक जमीन के रिकॉर्ड में उत्तराधिकारी का नाम नहीं होने से रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अटक रही है।

जिला कृषि कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 19 लाख 34 हजार 917 रैयत किसान हैं। इनमें से दो लाख 11 हजार 446 किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मिल रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सम्मान निधि का लाभ लेने वाले किसानों में से 55 हजार 439 की किसान रजिस्ट्री बनाई गई है। वहीं, जिले में अब तक कुल एक लाख 65 हजार 809 किसानों की डिजिटल फार्मर आइडी तैयार हो चुकी है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि किसान रजिस्ट्री बनाने की प्रक्रिया में अभी काफी काम बाकी है। ऐसे में भू-अभिलेखों की विसंगतियों का समय पर निराकरण नहीं होने से रजिस्ट्री की गति प्रभावित होने की आशंका है।

आनलाइन लगान रसीद में खाता, खेसरा और रकबा गायब

बिरौल प्रखंड की पटनिया पंचायत के किसान गुणेश्वर प्रसाद कर्ण और उमाशंकर कुमर बताते हैं कि सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि किसान रजिस्ट्री के बिना अगले सीजन में खाद-बीज और सम्मान निधि का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है। इसी कारण वे रजिस्ट्री बनवाने के लिए वसुधा केंद्र पहुंचे।

वहां पता चला कि उनकी आनलाइन लगान रसीद में जमीन का खाता, खेसरा और रकबा दर्ज ही नहीं है। रसीद पर केवल नाम और लगान की राशि दिखाई दे रही है।

किसानों के अनुसार, अब उन्हें अंचल कार्यालय जाकर पहले जमीन के रिकार्ड में सुधार कराने और उसके बाद अनलाइन प्रक्रिया पूरी करने को कहा जा रहा है। उनका कहना है कि ऑनलाइन लगान रसीद में तकनीकी त्रुटि उनकी गलती नहीं है, फिर भी इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। जब तक अभिलेख दुरुस्त नहीं होंगे, तब तक किसान रजिस्ट्री बनवाना मुश्किल होगा।

पैतृक जमीन पर खेती, रिकॉर्ड में दादा का नाम

बहादुरपुर प्रखंड की खैरा पंचायत के किसान श्याम सुंदर सिंह और बबलू सिंह की परेशानी अलग है। उनका कहना है कि वे पूरी खेती पैतृक जमीन पर करते हैं।

जमीन अब भी उनके दादा के नाम पर दर्ज है और जमाबंदी भी उन्हीं के नाम से चल रही है। परिवार के भाइयों के बीच अभी तक जमीन का बंटवारा नहीं हुआ है। किसानों के मुताबिक, पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने के दौरान उत्तराधिकारी का नाम आनलाइन रिकार्ड में नहीं मिलने से उनका आवेदन स्वीकार नहीं हो रहा है।

वंशावली और पुराने कागजात लेकर शिविरों में जाने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आ रहा कि पहले जमीन के रिकॉर्ड में उत्तराधिकारी का नाम दर्ज कराएं या किसान रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करें।

डिजिटल फार्मर आइडी का उद्देश्य किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना है, लेकिन भू-अभिलेखों में त्रुटियां इस प्रक्रिया में बाधा बन रही हैं।

किसानों की मांग है कि पंचायत स्तर पर लगाए जा रहे शिविरों में रजिस्ट्री बनाने के साथ-साथ राजस्व संबंधी समस्याओं के समाधान की भी व्यवस्था हो।

आनलाइन लगान रसीद में खाता, खेसरा और रकबा दर्ज नहीं होने तथा पैतृक जमीन के रिकार्ड में उत्तराधिकारी का नाम नहीं होने जैसी समस्याओं के लिए विशेष व्यवस्था बनाई जाए, ताकि किसानों को एक ही काम के लिए बार-बार अलग-अलग कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़े।

जिलाधिकारी की ओर से समय-समय पर शिविर लगाकर लक्ष्य पूरा करने का निर्देश दिया जाता है। यह पूरा मामला राजस्व से जुड़ा हुआ है। राजस्व अधिकारी जैसे-जैसे जमाबंदी सुधार कर देते हैं। उन किसानों की डिजिटल फार्मर आइडी बनाई जा रही है। कार्य में कोताही बरतने वाले कर्मियों पर सख्त रुख अपनाया जा रहा है। डीएम ने हाल ही में जाले अंचल में लापरवाही बरतने वाले एक राजस्व कर्मचारी को निलंबित भी किया गया है।
डा. सिद्धार्थ - जिला कृषि पदाधिकारी, दरभंगा।

यह भी पढ़ें- PM Kisan Installment: किसानों के लिए खुशखबरी, सरकार ने मोबाइल पर भेजा मैसेज, प्रधानमंत्री मोदी देंगे तोहफा