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दरभंगा में ग्रेजुएट की बड़ी आबादी बावजूद मतदान से दूर लाखों ग्रेजुएट, आखिर क्यों पीछे हैं युवा

Published: Mon, 26 Oct 2026 08:31 PM (IST)

दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में बड़ी संख्या में स्नातक होने के बावजूद मतदाता सूची में उनका पंजीकरण काफी कम है। ...और पढ़ें

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।

HighLights

  1. दरभंगा में छह लाख स्नातकों में से कम पंजीकरण।

  2. केवल 1,26,951 स्नातकों ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराया।

  3. जागरूकता की कमी और प्रशासनिक उदासीनता प्रमुख कारण।

प्रिंस कुमार, दरभंगा । ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के चार प्रमुख जिलों दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय में स्नातक उत्तीर्ण युवाओं की बड़ी आबादी है। इसके बावजूद बिहार विधान परिषद के दरभंगा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में उनकी भागीदारी कम बनी हुई है।

आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में विश्वविद्यालय के अंगीभूत और संबद्ध महाविद्यालयों से लगभग छह लाख छात्र-छात्राओं ने स्नातक की डिग्री पूरी की।

इनमें से केवल 1,26,951 योग्य युवाओं ने स्नातक मतदाता के रूप में अपना नाम दर्ज कराया है। यानी पात्र स्नातक आबादी का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मतदान की इस प्रक्रिया से बाहर है। जिलावार आंकड़े भी कम पंजीकरण की स्थिति दिखाते हैं।

समस्तीपुर में 34,429, दरभंगा में 34,001, मधुबनी में 29,316 और बेगूसराय में 29,205 मतदाता पंजीकृत हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के प्रति युवाओं का रुझान सीमित है।

छात्र नेता प्रिंस राज, शरद कुमार सिंह, किसन कुमार झा आदि ने बताया कि जागरूकता की कमी और प्रशासनिक स्तर पर प्रभावी प्रयासों का अभाव इसके प्रमुख कारण हैं। मतदाता बनने के लिए जरूरी फार्म-18 भरने की समय-सीमा, आनलाइन पोर्टल और विशेष पंजीकरण शिविरों की जानकारी पर्याप्त संख्या में स्नातकों तक नहीं पहुंच पाती।

विश्वविद्यालय और कालेज स्तर पर व्यापक पंजीकरण अभियान भी नहीं चलाए गए। डिजिटल और इंटरनेट मीडिया के प्रसार के बावजूद आनलाइन आवेदन प्रक्रिया का कालेजों में समुचित प्रचार नहीं हुआ। स्नातक मतदाताओं की कम भागीदारी का असर उच्च शिक्षा, रोजगार और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर भी पड़ता है।

जब बड़ी संख्या में स्नातक मतदान प्रक्रिया से बाहर रहते हैं, तो उनके हितों और समस्याओं को शासन-प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की संभावना सीमित हो जाती है। इस स्थिति में सुधार के लिए छात्र संगठनों और प्रबुद्ध वर्ग ने प्रशासन तथा विश्वविद्यालय प्रबंधन से ठोस कदम उठाने की मांग की है।

सुझाव दिया है कि विश्वविद्यालय के सभी महाविद्यालयों में फार्म-18 भरने के लिए विशेष शिविर लगाए जाएं। डिग्री वितरण या दीक्षांत समारोह के दौरान योग्य स्नातकों को मतदाता पंजीकरण की सुविधा देने की व्यवस्था भी की जाए।

इसके साथ ही कालेजों के आधिकारिक पोर्टल, नोटिस बोर्ड और इंटरनेट मीडिया मंचों पर पंजीकरण की जानकारी नियमित रूप से साझा की जाए। समय रहते ऐसे कदम नहीं उठाए गए तो उच्च शिक्षित युवाओं का बड़ा वर्ग लोकतांत्रिक प्रक्रिया की इस महत्वपूर्ण कड़ी से दूर बना रह सकता है।

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