दरभंगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, नई दिल्ली के संयुक्त महानिदेशक डॉ. संजय मंजुल ने सोमवार को लनामिवि के स्नातकोत्तर प्राचीन भारतीय इतिहास पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग का निरीक्षण किया। डॉ. मंजुल ने सबसे पहले मोतीमहल अभिलेख का अवलोकन किया। इसके बाद उन्होंने विभागीय शोधार्थी मुरारी कुमार, गौतम प्रकाश, अभय यादव, प्रगति कुमारी, पुष्पांजलि कुमारी आदि के द्वारा किए गए विभिन्न पुरास्थलों के सर्वेक्षण में संग्रहित पुरावशेषों का अवलोकन किया। साथ ही, पुरास्थल एवं पुरावशेष से संबंधित विभिन्न पहलुओं के बारे में शोधार्थियों व छात्र-छात्राओं को जानकारी दी। उन्होंने विभागीय छात्रों व शोधार्थियों के कार्यों को सराहा। डॉ. मंजुल ने सर्वेक्षण तकनीक पर तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित करने की सलाह दी, ताकि पुरातत्व में अभिरूचि रखने वाले प्रशिक्षित हो सकें। विभागाध्यक्ष डॉ. अयोध्या नाथ झा ने कहा कि अगले माह इस कार्यशाला का आयोजन हो सकता है। शोधार्थी मुरारी कुमार झा ने कहा कि दरभंगा के करीब ढाई से तीन सौ पुरास्थल ऐसे हैं जिसकी उपरी सतह पर बिखरे पुरावशेष एक ही कालखंड के प्रतीत होते हैं। दरभंगा में मौजूद दो जीवाश्म (शिवलिग) सहित कई अन्य पहलुओं से भी अवगत हुए। विभागाध्यक्ष डॉ. झा ने विभाग में पठन-पाठन पर चर्चा की। डॉ. मंजुल ने विभाग को छात्रों के अध्ययन के लिए प्रस्तर उपकरण उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। मौके पर प्रसिद्ध चित्रकार राजेंद्र प्रसाद, अभय यादव, गौतम प्रकाश, पुष्पांजलि कुमारी, पूर्णिमा कुमारी, ऋतू कुमारी, अभिमन्यु कुमार, विनय कुमार, संतोष कुमार, सुभाष कुमार, प्रभाकर कुमार, गोपाल मिश्र, गोविद कुमार, विकास कुमार, कृष्णा कुमार आदि शोधार्थी व छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस