बक्सर : अनुमंडल इलाके के दक्षिणी-पूर्वी भाग में अवैध तरीके से मिट्टी उत्खनन के कारण कांव नदी के किनारे बसे कई गांवो का वजूद मिटने की कगार पर है। क्षेत्र के खलवाइनार से लगायत खेवली पंचायत के सुखसेना डेरा एवं कोरान सराय के मठिया डेरा गांव तक प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक मिट्टी की कटाई हो रही है। लेकिन विभाग के अधिकारी इस मामले में खुद को अनजान साबित करने में लगे हैं।

जानकार सूत्रों की माने तो बालू एवं मिट्टी कारोबारियों एवं उत्खनन विभाग के अधिकारियों के बीच हुई आपसी समझौता में यहां बेरोक-टोक मिट्टी की कटाई की चलती रहती है। इस कार्य में लगे कुछ लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि इस खेल में लोकल अधिकारियों की भी भागीदारी सुनिश्चित होती हैं। अवैध मिट्टी कटाई के पीछे खेल चाहे जो भी हो, लेकिन कांव नदी के किनारे बसकर जीवन यापन करने वाले कई गांवों के लोगों के लिए अवैध तरीके से मिट्टी कटाई के बाद बने खतरनाक गड्ढे मौत को दावत दे रहा है।

स्कूली बच्चों के गिरने की रहती है आशंका

चौगाईं प्रखंड के अंतिम छोर पर बसे व खेवली पंचायत का सुखसेना डेरा गांव में तकरीबन ढाई सौ बच्चे वैसे है जिनकी उम्र 6-14 वर्ष की है। यहां दो प्रखंडो की लड़ाई में आज तक स्कूल नहीं खंल पाया। ऐसी स्थिति में इन गांवों के बच्चें मिट्टी कटाई से बने गड्ढों के किनारे से होकर कोरानसराय एवं मुंगाव के स्कूल में पढ़नें के लिए जाते है। बरसात शुरू होते ही पानी से भरे गहरे गड्ढों की मेढ़ पर बने रास्ते में फिसलन पैदा हो जाती है। शाम तक घर लौट कर आएंगे कि नहीं इसको लेकर इनके स्वजन हमेशा सशंकित रहते है।

सरकारी जमीन हड़पने की मची होड़

कोरानसराय से डुमरांव तक हजारों एकड़ सरकारी जमीन को कब्जा करने के चक्कर में कुछ ग्रामिणों द्वारा विरोध की जगह मिट्टी कटाई कराने में सहयोग किया जाता है। मिट्टी उत्खनन के बाद ऐसे लोग इस सरकारी जमीन को समतल बनाकर खेत बना लेते है। नतीजतन कांव नदी के किनारे बसे ग्रामीण मौत से खेल कर भी मुंह खोलना उचित नहीं समझते है। कोरानसराय से डुमरांव तक तकरीबन सैकडों एकड़ जमीन पर मिट्टी कटाई के बाद अवैध तरीके से कब्जा भी कर लिया गया है।

------------------

अवैध तरीके से मिट्टी उत्खनन का मामला काफी गंभीर है। इसकी सूचना पहले मिली थी और छापेमारी भी किया गया, लेकिन कोई मिला नहीं। इस मामले में अविलंब कारवाई होगी।

पारसनाथ चौधरी, खनन पदाधिकारी- बक्सर

Edited By: Jagran