बक्सर में बड़ा पंचायत घोटाला: 56 लाख की सामग्री खरीद में फर्जीवाड़ा, मुखिया और पंचायत सचिव पर गिरेगी गाज
बक्सर के राजपुर प्रखंड की धनसोई पंचायत में विकास योजनाओं के लिए 56 लाख रुपये की सामग्री खरीद में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है।

बक्सर में बड़ा पंचायत घोटाला (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
धनसोई पंचायत में 56 लाख रुपये का सामग्री खरीद घोटाला।
फर्जी विपत्रों से 'मेसर्स ममता एंटरप्राइजेज' को किया गया भुगतान।
दोषी मुखिया और पंचायत सचिव पर कड़ी कार्रवाई के आदेश।
जागरण संवाददाता, बक्सर। जिले के राजपुर प्रखंड की धनसोई पंचायत में विकास योजनाओं के लिए खरीदी गई सामग्री के भुगतान में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में प्रथम दृष्टया यह बात सामने आई है कि पंचायत के कार्यों के लिए सामग्री की खरीद जिन एजेंसियों से की गई, उनके बजाय दूसरी एजेंसी 'मेसर्स ममता एंटरप्राइजेज' के नाम से फर्जी विपत्र तैयार कर भुगतान किया गया।
मामले में पंचायती राज विभाग-सह-द्वितीय अपीलीय प्राधिकार ने बक्सर के जिला पदाधिकारी को दोषी मुखिया तुलसी साह और पंचायत सचिव अमित राज के विरुद्ध बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के तहत नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
साथ ही फर्जीवाड़े में इस्तेमाल की गई एजेंसी 'मेसर्स ममता एंटरप्राइजेज' के विरुद्ध प्राथमिकी कराने तथा फर्जी तरीके से भुगतान की गई राशि का आकलन कर दोषियों से वसूली का आदेश दिया गया है।
56 लाख 49 हजार रुपये की सामग्री खरीदी
मामला धनसोई पंचायत के गोगौरा निवासी नितीश कुमार की ओर से दायर द्वितीय अपील से जुड़ा है। अपीलकर्ता के अनुसार पंचायत में विभिन्न योजनाओं के निर्माण के लिए 'श्री ब्रिक्स' और 'जय मां कामाख्या ट्रेडर्स' से कुल 56 लाख 49 हजार रुपये की सामग्री खरीदी गई थी।
इसके एवज में एक बार 37.60 लाख रुपये और दूसरी बार 2.06 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 16 लाख 82 हजार 289 रुपये अब भी बकाया हैं। भुगतान नहीं होने के कारण संबंधित पक्ष को बैंक ऋण पर ब्याज का भार उठाना पड़ रहा है।
जब मामले की जांच शुरू हुई, तो पाया गया की पंचायत से संपूर्ण राशि का भुगतान अलग-अलग एजेंसियों को किया जा चुका है। इसमें एक एजेंसी मेसर्स ममता इंटरप्राइजेज भी थी।
इनवायस को प्रथम दृष्टया फर्जी पाया गया
मामले की सुनवाई के दौरान प्रथम अपीलीय प्राधिकार और राज्य-कर संयुक्त आयुक्त की जांच रिपोर्ट से भुगतान में गड़बड़ी का खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि पंचायत की ओर से सामग्री की वास्तविक खरीद 'श्री ब्रिक्स' और 'जय मां कामाख्या ट्रेडर्स' से किए जाने के बावजूद भुगतान 'मेसर्स ममता एंटरप्राइजेज' के नाम से प्रस्तुत विपत्र के आधार पर किया गया।
जांच में इस्तेमाल किए गए इनवायस को प्रथम दृष्टया फर्जी पाया गया। वहीं, 'मेसर्स ममता एंटरप्राइजेज' का जीएसटी पंजीकरण भी सात अक्टूबर 2024 से निलंबित पाया गया। जांच के दौरान पंचायत सचिव के स्तर पर ऐसी कोई आधिकारिक आपूर्ति दर्ज होने की बात भी सामने नहीं आई।
'मेसर्स ममता एंटरप्राइजेज' के विरुद्ध प्राथमिकी कराने को कहा गया
प्राधिकार ने मामले को गंभीर मानते हुए डीएम को निर्देश दिया है कि पूरे प्रकरण की नियमानुसार कार्रवाई करते हुए दोषी मुखिया और पंचायत सचिव के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही फर्जी विपत्र के आधार पर किए गए भुगतान और उससे संबंधित सामग्री की राशि का आकलन कर दोषियों से वसूली सुनिश्चित करने तथा 'मेसर्स ममता एंटरप्राइजेज' के विरुद्ध प्राथमिकी कराने को कहा गया है।
आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि अपीलकर्ता का वैध भुगतान वास्तव में लंबित है, तो इसकी जांच कराकर बकाया राशि का शीघ्र भुगतान कराने का भी निर्देश दिया गया है।
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