बक्सर में लावारिस शव को घसीटकर ले जाने का वीडियो वायरल, सिविल सर्जन ने दिए जांच के आदेश
बक्सर के पुराने सदर अस्पताल परिसर स्थित पोस्टमार्टम हाउस से जुड़ा एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक व्यक्ति शव को घसीटकर अंदर ले जाता दिख रहा है।
HighLights
वायरल वीडियो में शव को घसीटकर पोस्टमार्टम हाउस ले जाया गया।
राजकीय रेल थाना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए।
सिविल सर्जन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए।
जागरण संवाददाता, बक्सर। पुराने सदर अस्पताल परिसर स्थित पोस्टमार्टम हाउस से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों इंटरनेट पर प्रसारित हो रहा है। करीब एक पखवाड़ा पुराना बताए जा रहे इस वीडियो में लुंगी-कुर्ता पहने एक व्यक्ति कपड़े में लिपटी भारी-भरकम वस्तु को खींचते हुए पोस्टमार्टम हाउस के रैंप से अंदर ले जाता दिखाई दे रहा है।
वीडियो को प्रसारित करते हुए दावा किया जा रहा है कि व्यक्ति एक शव को घसीटकर पोस्टमार्टम हाउस के अंदर ले जा रहा है। वीडियो दूर से बनाया गया है। मामले की पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने बक्सर की पोस्टमार्टम व्यवस्था के साथ-साथ राजकीय रेल थाना की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया
जानकारी के अनुसार, यह मामला राजकीय रेल थाना के माध्यम से पोस्टमार्टम हाउस भेजे गए एक अज्ञात शव से जुड़ा बताया जा रहा है। जीआरपी थाना अध्यक्ष मणि चंद्र पांडेय के मुताबिक, 31 अगस्त को इटाढ़ी गुमटी के पास स्थित लाइट ओवर ब्रिज से एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया था।
शव की पहचान नहीं हो सकी थी और उसे एक निजी व्यक्ति के माध्यम से पोस्टमार्टम हाउस भेजा गया था। जीआरपी के अनुसार, ऐसे शवों को पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाने, पोस्टमार्टम के बाद निर्धारित अवधि तक रखने और पहचान नहीं होने पर अंतिम संस्कार कराने की जिम्मेदारी इसी निजी व्यक्ति को दी गई है। थाना अध्यक्ष ने बताया कि प्रति शव इस काम के लिए पांच हजार रुपये दिए जाते हैं।
अज्ञात शव से संबंधित होने की संभावना
जीआरपी के मुताबिक, पोस्टमार्टम हाउस में शव को रिक्शा या ठेला से उतारकर अंदर ले जाने का काम उक्त निजी व्यक्ति और वहां कार्यरत एक अन्य व्यक्ति द्वारा किया जाता है। थानाध्यक्ष ने वीडियो के इसी अज्ञात शव से संबंधित होने की संभावना जताई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें वीडियो की जानकारी गुरुवार को ही मिली।
दूसरी ओर, शव को पोस्टमार्टम हाउस तक पहुंचाने वाले व्यक्ति ने अलग दावा किया है। उसका कहना है कि उसे पूरे काम के लिए करीब 1500 से 2000 रुपये ही मिलते हैं।
उसके अनुसार, इसी रकम में रेलवे स्टेशन या शव मिलने के स्थान से शव उठाकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाना, पोस्टमार्टम के बाद तीन दिन तक इंतजार करना और फिर अंतिम संस्कार करना शामिल है। दोनों पक्षों के दावों में यह अंतर अपने आप में व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।
सिविल सर्जन ने दिए जांच के आदेश
मामले की जानकारी मिलने के बाद सिविल सर्जन डा. शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती ने जांच के निर्देश दिए हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि वीडियो में वास्तव में क्या दिखाया गया है, शव को पोस्टमार्टम हाउस तक किस प्रक्रिया के तहत पहुंचाया गया और इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी।
राजकीय रेल पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल
सबसे बड़ा सवाल हालांकि पोस्टमार्टम हाउस की चारदीवारी से बाहर निकलकर राजकीय रेल थाना की कार्यशैली पर खड़ा होता है। जब जीआरपी किसी अज्ञात शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजती है और उसकी पूरी प्रक्रिया के लिए किसी निजी व्यक्ति पर निर्भर रहती है, तो निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था क्या है? क्या शव को पोस्टमार्टम हाउस तक ले जाते समय जीआरपी का कोई कर्मचारी या अधिकारी साथ रहता है? यदि रास्ते में शव बदल जाए, शव के साथ छेड़छाड़ हो या बिना पोस्टमार्टम के ही अंतिम संस्कार कर दिया जाए, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होगी?
